बिट्टू संखं/सरगुजाः समर्थन मूल्य पर धान की संख्या अब 25 दिनों से चल रही है, लेकिन सरगुजा, सूरजपुर, बिहार, कोरिया, और मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में धान की लोकप्रियता है। पिछले मसाला सीजन में 25 नवंबर को पांचों में 6,662 किसानों ने दो लाख 52 हजार 888 रुपये का समर्थन मूल्य लगाया था। इस सीजन में अभी तक केवल 1323 किसानों ने 57 हजार 360 औसत धान की बिक्री समर्थन मूल्य पर की है।
असल में, पिछले सीजन में आज की स्थिति में सभी उपार्जन आधिपत्य में धान की बोहनी हो चुकी है, लेकिन चालू सीजन में सिर्फ 68 उपार्जन आधिपत्य में ही धान आबंटन हो गया है। पांचों उद्यमों में 135 उपार्जन केंद्र हैं, जहां अभी तक धान की फैक्ट्री की शुरुआत नहीं हो पाई है। इस साल धान की बिक्री के लिए समर्थन मूल्य 2 लाख 6 हजार 975 रुपये किसानों ने खरीदा है, लेकिन अभी तक केवल 1323 किसानों के पास ही धान बेचने का समर्थन मूल्य है। मौसम को देखते हुए कई किसान जल्दी से धान की कमी की चाहत जता रहे हैं, लेकिन कटाई और मिसाई की कमी के कारण उपार्जन धान में धान ले किसान नहीं बेच पा रहे हैं।
देरी से धान की रुपाई का कारण
उत्तर छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान के अनुपात में कई उत्पादों की जोर पकड़ मजबूत बनी हुई है। किसानों का कहना है कि इस वर्ष कठिनाई तो हुई लेकिन बीच में स्थिति खराब होने से धान की खेती में भी समय लग गया। सितंबर के अंतिम सप्ताह तक धान की फसल खराब हो गई थी, इसलिए अभी भी धान में देरी हो रही है। कटिंग और मिसाई का काम तेजी से चल रहा है, दिसंबर के दूसरे सप्ताह से उपार्जन में धान की बिक्री करने वाले किसानों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है।
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नई सरकार की हो रही प्रतीक्षा
उत्तर छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान के मूल्य के लिए कई किसान नई सरकार के गठन की प्रतीक्षा कर रहे हैं। 20 पुराने अनाज की कीमत और कर्ज़ का भी वादा किया गया है। इसके बाद किसान 3 दिसंबर तक प्रतीक्षा कर रहे हैं, जिसके बाद गांव में धान की बिक्री की चर्चा होगी। अभी तक धान बिक्री पर कर्ज का समायोजन भी हो रहा है। हालाँकि, कई किसान सुरक्षा लाभ से धान मान रहे हैं।
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पहले प्रकाशित : 27 नवंबर, 2023, 15:21 IST
