उत्तर
इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (आइबीएस) पेट से जुड़ी समस्या है, जो पाचन तंत्र को पूरी तरह से प्रभावित करती है।
यह बीमारी प्लास्टिक में अनाज का संतुलन बनाए रखने से होती है, जिससे पेट में दर्द, गैस, सूजन जैसी समस्याएं होती हैं।
चिड़चिड़ा आंत्र सिंड्रोम के उपचार: अनहेल्दी लाइफस्टाइल और अनहेल्दी स्टेटस कई तरह की शर्तों को देने के लिए काफी है। ऐसी ही एक बीमारी का नाम है इरिटेबल बाउल सिंड्रोम। आईबीएस (इरिटेबल बाउल सिंड्रोम) पेट से जुड़ी एक समस्या है, जो पाचन तंत्र को प्रभावित करती है। यह बीमारी में वसा का संतुलन बनाए रखने की वजह से होता है। इस परेशानी में पीड़ित को पेट दर्द, गैस, सूजन, कब्ज और डायरिया जैसी समस्याएं होती हैं। इसकी ऐसी ही विशेषता है कि पुनः आरंभ-बैठने में भी परेशानी हो सकती है। इससे जुड़े सामान के लिए लोग बाजार से टुकड़ियों का सहारा लेते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ घरेलू उपाय भी आप मदद कर सकते हैं। अचल संपत्ति लखनऊ के आयुर्वेदाचार्य डॉ. अन्य शर्मा आइए जानते हैं इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम से छुटकारा पाने के उपाय-
इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम से छुटकारा पाने के 5 आसान उपाय
अदरक: पेट से जुड़े कई प्रोटोटाइप से लेकर यहां तक कि भूखा भी बेहद खतरनाक है। बता दें कि इसमें एंटीऑक्सिडेंट, एंटी-इंफ्लेमेट्री और एनाल्जेसिक गुण मौजूद होते हैं, जो पेट की समस्याओं को दूर कर पाचन तंत्र को निर्धारित करने का काम करते हैं। अदरक के साथ ही जिंजरोल मौजूद होता है, जो पाचन क्रिया और पेट की मांसपेशियों को बेहतर बनाता है। अदरक के नियमित सेवन से गैस, अपच, कब्ज और पेट में ऐंठन जैसी समस्याओं से राहत मिल सकती है। इस परेशानी से बचने के लिए आप अदरक की चाय का सेवन कर सकते हैं।
त्रिफला: पाचन तंत्र को बनाए रखने के लिए त्रिफला को बेहद प्रभावशाली माना जाता है। आयुर्वेद में इसका प्रयोग शरीर की कई समस्याओं को दूर करने के लिए किया जाता है। असल में, त्रिफला 3 आयुर्वेदिक जड़ी बूटी जड़ी बूटी, हरीतकी और बिभीतकी को मिलाकर बनाया जाता है। इसमें ऐसे कई औषधीय गुण पाए जाते हैं, जो पाचन क्रिया को बेहतर बनाने का काम करते हैं। इसका सेवन करने से यह मल को नरम बना देता है, जिससे पेट आसानी से साफ हो जाता है। त्रिफला चिप्स का सेवन आप रात में सोने से पहले गुनगुने पानी से कर सकते हैं।
हींग: खाने का स्वाद बढ़ाने वाली हींग पेट से जुड़ी चुनौती को दूर करने में प्रभावशाली लगती है। असल में, हींग में मौजूद औषधीय गुण पाचन अग्नि को बढ़ाने का काम करते हैं। इसका नियमित सेवन करने से गैस, कंजेशन और अपच जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसके लिए एक चुटकी हींग को नुकसान और काले नमक के साथ अद्भुत खाना होता है। ऐसा करने से जल्द ही आईबीएस की समस्या का समाधान मिल सकता है।
घी-गुड़: घी और गुड़ की सेहत के लिए मिलते हैं। बता दें कि, आईबीएस की समस्या में गाय के घी के साथ गुड़ का सेवन काफी फायदेमंद हो सकता है। असली, घी एक नाइचुरल लैक्सिवेटिव है, जो मल को नर्म बनाने का काम करता है। इसके अलावा, यह पेट की सूजन को भी कम करने में मदद करता है। यदि आप इन दोनों को विस्तृत रूप से जानते हैं तो बॉवेल लीवर सही रहता है और पाचन संबंधी संबद्धता से संबंधित है।
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इसबगोल: हींग, घी और गुड़ के साथ इसबगोल भूसी भी पाचन तंत्र को ठीक करने का काम करती है। बता दें कि, पाचन संबंधी समस्याओं में इसबगोल की भूसी औषधि का काम करती है। इसमें कठोर और लैक्सेटिव गुण मौजूद होते हैं, जो मल त्याग की प्रक्रिया को आसान बनाते हैं। इससे आपको कब्ज की समस्या से राहत मिल सकती है। इसके लिए आप रात को सोने से पहले ईसबगोल की भूसी का सेवन पानी या दूध के साथ कर सकते हैं।
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पहले प्रकाशित : 29 अगस्त, 2023, 01:20 IST
