शक्ति सिंह/कोटा. कोटा का तिब्बती बाजार ऐसा बाजार है जहां ऊनी उत्पादों का फैशन और विकल्प बेशुमार है। ये मार्केट एक बार फिर पारंपरिक अंदाज में सज चुका है। ऐसे में यहां कोटा ही नहीं गांव से लेकर शहर तक की भीड़ उमड़ रही है। युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक और युवतियों से लेकर महिलाओं बच्चों तक की हर डिजाइन पूरी हो रही है। बच्चों के लिए भी साबुत ऊनी कपड़े भी बाजार में मौजूद होते हैं। शहर में इस बाज़ार की साख यूँ ही नहीं है। चार दशक से इस उद्यम की मांग पर सवाल उठ रहे हैं। माल और शापिंग के दौर में भी खुद की उपयोगिता साबित हो रही है। यह देखने की जरूरत नहीं है कि टाउनहाल मैदान में जाड़े के मौसम में पिछले चार महीने से यह बाजार कोटा के लोगों की जरूरत बन गया है।
खोदे वाले बाबा घोड़े पर लगे इस बाजार में आई तिब्बती महिला मॅराड डिक्की ने बताया कि 35 साल से हर साल हम यहां गर्म कपड़े की अपनी दुकान लगा रहे हैं। यहां ₹200 से लेकर तीन से ₹4000 तक के हॉट कपड़े हैं। जो छोटे बच्चों से लेकर बड़े बुजुर्ग महिलाओं तक के शॉल, जैकेट, स्टेपल सभी चीजें मिल जाएंगी। बड़ी दुकान और शोरूम की अगर बात करें तो तिब्बती बाजार में रीजन रेट पर गर्म कपड़े दिए गए हैं और शोरूम पर उनकी कीमत सबसे ज्यादा रहती है। यहां पर कई तरह की क्वालिटी के आकर्षक कपड़े मिलेंगे। जो शोरूम पर हजारों रुपए का आगमन हुआ वह तिब्बती बाजार में ₹600 का मिल जाएगा।
चार महीने तक रहना मनपसंद हैं
तिब्बती सामान को परिवार के साथ यहां चार महीने तक रखा जाता है, ऐसे में सभी आलीशान सामान बनाते हैं। कोई भी किराएदार किराए पर रहता है तो कोशिश करता है कि आसपास ही रहने की व्यवस्था हो, जिससे वह आसानी से दुकान चला सके। आमतौर पर सभी दिग्गज हर बार एक ही मकान में रहते हैं। उन्होंने वैधानिक मकान मालिक से इसे लेकर अधिकार कर रखा है। लंबे समय तक जब तक वे रहते हैं, इसलिए खाने की सोच भी खुद का करते हैं। सामान साथ लेकर आते हैं और खुद बनाते हैं।
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पहले प्रकाशित : 29 नवंबर, 2023, 16:53 IST
