Homeमनोरंजनदेसी घी और शुद्ध खोया से बनाओ, असली टार्की... साधु की मन...

देसी घी और शुद्ध खोया से बनाओ, असली टार्की… साधु की मन की बात तो चमकदार किस्मत, असल में इस मिठाई की धूम


आलोक कुमार/गोपालगंज. बिहार के गोपालगंज के थावे भवानी मंदिर की करीब 300 साल पुरानी जागृति के रूप में मान्यता है। इसी वजह से यहां ना सिर्फ बल्कि बिहार के कई साथियों से भ-अजरात आते हैं। वहीं, थावे भवानी के दरबार में पूजा-अर्चना करने के लिए आने वाले भक्त शुद्ध खोया और देसी घी के बनी पिड़िया का स्वाद नहीं लेना भूलते हैं। इसके साथ वह थावे भवानी के प्रसाद के तौर पर पिडिकिया को अपने साथ जरूर लेकर जाते हैं। पिडिकिया बनाने वाले साल का दावा है कि इस मिठाई की शुरुआत करीब 100 साल पहले बिहार के सीवान जिले के जीरादेई थाना क्षेत्र के नरेंद्रपुर गांव निवासी लक्ष्मी साह के बेटे गौरीशंकर साह की थी। अपने पिता की मृत्यु के बाद चार साथी जटा शंकर साह, शिवशंकर साह और विश्वनाथ साह के साथ गोपालगंज के थावे स्थित विदेशी गांव में रहने लगे, जो कि उनके ननिहाल थे। साकिआ पिडिकिया बनाने की शुरुआत और फिर हाट, बाजार और मेले से जुड़ी जगह घूमने-फिरने की जगह लगी।

गौरीशंकर साह के पुत्र अनिल गुप्ता ने बताया कि 100 वर्ष पूर्व दादा गौरीशंकर साह सीवान जिले से आये थे और पिडिकिया बनाने का काम शुरू हुआ था। इसी बीच साधुओं के रूप में जीन बाबा ने अपने क्षेत्र के पास जाकर सलाह दी कि देसी घी और शुद्ध खोया से पिड़िया बेचेंगे, तभी टार्की होगी। इसके बाद वह आशीर्वाद देते हुए कुछ ही दूरी पर अदृश्य रूप से चला गया। उन्होंने बताया कि साधु की सलाह पर दादा जी ने देसी घी और खोया से पिडिकिया बनाना शुरू किया। कुछ ही दिन बाद काफी फ़ायदा हुआ। इसके बाद न सिर्फ जमीन खरीदकर घर बनाया बल्कि दुकान खोली ली। उसी समय से शुद्ध घी और खोया से पिड़िया बनाने की शुरुआत हुई, जो आज तक शामिल है।

गौरीशंकर के नाम से चलने वाली कारों में करीब 30 मूर्तियाँ हैं
अनिल गुप्ता ने बताया कि थावे भवानी मंदिर के पास गौरीशंकर मिष्ठान भंडार के नाम से आपको कई एक ही कतार में देखने को मिल जाएगा। इसके अलावा शंकर गौरी मिष्ठान भंडार, गोपालगंज, पटना, सीवान और बड़हरिया में भी है। गौरीशंकर के नाम से 25 से 30 दुकानें संचालित हो रही हैं और गौरीशंकर के 300 परिवार जुड़े हुए हैं। एक दुकान से प्रतिदिन लगभग 50 किलो पिडिकिया की बिक्री होती है। चैत्र शरद ऋतु की शरद ऋतु में इसकी बिक्री एक मॉडल से अधिक हो जाती है। यूपी के उद्योगपति से आये रामकृष्ण यादव ने बताया कि गौरीशंकर पिडिकिया बेहद खस्ता है।

ये है पिडिकिया बनाने का तरीका
अनिल गुप्ता ने बताया कि पिडिकिया बनाने के लिए करीब आधा दर्जन से ज्यादा लोग रहते हैं। सबसे पहले मैदा में घीसा नोबेल गुथा जाता है। फिर इसे रोटी की तरह बेल इनकर खोया की सिफारिश के बाद पिडिकिया का आकार घी में टाल दिया जाता है। तली हुई मिठाई को चीनी की चाशनी में डुबोया जाता है. कुछ देर बाद उसे बाहर निकाल कर एक अलग पोथी में रख दिया गया और फिर उसे खाने के लिए इस्तेमाल किया गया। साथ ही बताया कि पिडिकिया का एक पीस 15 रुपये का है। वहीं, एक बच्चे का भाव 200 रुपए है। इसके साथ-साथ लेखक ने कहा कि पिडिकिया के बिजनेस से महीने में एक लाख की कमाई होती है। बता दें कि इस मंदिर में बिहार के अलावा यूपी, झारखंड और नेपाल से भी श्रद्धालु आते हैं। साथ ही प्रसाद के रूप में पिडिकिया को लेना नहीं भूलते हैं।

टैग: खाना, भोजन 18, गोपालगंज खबर



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Must Read

spot_img