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पैरा ठंडा होते ही बच्चों में कोल्ड डायरिया का खतरा, जाने लक्षण और उपाय


अर्थशास्त्र सेजू/बाडमेर। थार नगरी में अचानक मौसम में बदलाव के साथ ही सर्दी डायरिया के साथ खांसी, जुखाम, बुखार और निमोनिया के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। बच्चों के अलावा बच्चों के लिए यह मौसम काफी घातक साबित हो सकता है। ऐसे में किशोर बच्चों को बिस्तर से आराम के लिए डॉक्टर की सलाह पर इंजेक्शन लेकर जाना जरूरी है।

पश्चिम राजस्थान में बदले मौसम के मिजाज के बाद शीतलहर शुरू हो गई है ऐसे में बच्चों की देखभाल अब बाकी है। उन्हें ठंड से बचने के साथ ही रसोई पर सामान भी नहीं रखना होगा। इन दिनों जैविक जिला अस्पताल में नन्हें बच्चों के इलाज के लिए मकूल प्रबंधन दिया गया है। अचानक से बदले मौसम के कारण बच्चों में बुखार, खांसी, लूज मोशन और बुखार जैसी बीमारी के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं।

अधिक ठंड में रहना है निमोनिया का खतरा
जिला अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. चौहान का कहना है कि बच्चों को ठंड पर सबसे ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है, क्योंकि इस मौसम में मां की जरा सी दिक्कतों में बच्चों को परेशानी हो सकती है। उन्होंने लिखा है कि कोल्ड डायरिया में दस्त, भूख न लगना, कंपनी कंपी, पूरे दिन गरीबी रहना, पेट दर्द की समस्या बढ़ जाती है। अधिक ठंड में निमोनिया होने का भी खतरा रहता है।

आहार से मुक्ति के लिए करना होगा ये उपाय
चौहान के अनुसार बच्चों के फेफड़े में इंफेक्शन और लगातार खांसी आना, सीने में खड़खड़ाहट की आवाज, सांस का तेज चलना, चेहरा नीला पड़ना के लक्षण दिखाई देते हैं। ऐसे में बच्चों को डॉक्टर को तुरंत करवाअपकर की जांच करनी चाहिए। असल में बच्चों को डीहाइड्रेशन से बचाना जरूरी है। नियमित अंतराल पर बच्चों को पानी पीलाते रहना चाहिए। ठंड में गुनगुना पानी पीलाना अधिक आकर्षक होता है। बच्चे के शरीर में पानी की कमी होने पर डायरिया का खतरा बढ़ जाता है।

टैग: Barmer News, स्थानीय18, राजस्थान समाचार



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