वर्ष 2019 पाठक/अलवर. इन दिनों रोडवेज़ शहर की मंडी में हरी दुकान की अच्छी आवक हो रही है। समर के मौसम में विशेषज्ञ द्वारा भी हरी पुस्तक को अधिक से अधिक भोजन की सलाह दी जाती है। विशेषज्ञ के अनुसार जिन नोटबुक में पानी की मात्रा बहुत अधिक होती है। उन सब्जियों को खाना स्वास्थ्य के लिए होता है। तुरई ऐसी ही एक सब्जी है. इसे तोरू के नाम से भी जाना जाता है। टोरू को सेहत के लिए बहुत ही स्वादिष्ट माना जाता है।
यह सब्जी बाजार में लगभग 3 महीने तक उपलब्ध रहती है। विशेषज्ञ के अनुसार यह सब्जी का वजन मापा जाता है, रक्त शर्करा स्तर नियंत्रित किया जाता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाई जाती है और खुराक बनाए रखा जाता है। तोरू की सफलता की जानकारी अभी भी स्थानीय इलाके से हो रही है।
बाज़ार में पहली बार तीन महीने
इन दिनों अवेलेबल मंडी में सब्जी विक्रेता के मालिक राम सैनी ने बताया कि इन दिनों अवेलेबल मंडियों की अच्छी आवक हो रही है। यह फ़सल अभी भी स्थानीय इलाके से ही आ रही है। स्थानीय किसानों को भी अपनी फसल की अच्छी कीमत मिल मिलती है। यह सब्जी मंडी में 3 महीने में ही उपलब्ध रहती है। आजकल मंडियों में हरी सब्जी की आवक अच्छी हो रही है तो डिजायन भी उसके हिसाब से अच्छा ही हो रहा है। हालाँकि स्थानीय टोरू की अवाक कम होने के कारण दिल्ली से भी इसकी शुरुआत होती है।
30 रुपये किलो है कीमत
महान राम स्टालिन ने बताया कि अभी तोरू की अवाक पहाड़ी जिले के बिजवाड़, बालेटा, पृथ्वीपुरा क्षेत्र से हो रही है। मंडी में इसकी कीमत 30 से 35 रुपये के हिसाब से 20 से 25 रुपये किलो होलसेल में चल रही है. गर्मियों के मौसम में हरी सब्जियाँ लोग सबसे अधिक प्रचलित हैं। इस कारण तोरू की डिजायनर भी बाजार में अच्छी चल रही है। तोरू में धारिया होने के कारण कई बार लोग इसे सांप जैसी सब्जी भी कहते हैं।
शरीर के लिए हैं खतरनाक
गर्मियों के मौसम में हरी सब्जी खाने के बहुत फायदे हैं। टोरू में विटामिन सी, आयरन, स्टोन, मैग्नीशियम होता है। यह सभी इम्यूनिटी को मजबूत करने में प्रभावशाली साबित होता है। जैसे- पीलिया, सूजन, गैस, सर के रोग, घाव, पेट के रोग, सूखी खांसी, दमा सहित अन्य रोगों में कमाल साबित होता है। आयुर्वेद में टोरू कोलाज के रूप में भी काम लिया जाता है।
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पहले प्रकाशित : 28 अगस्त, 2023, 22:16 IST
