आशीष कुमार/पश्चिम चंपारण. बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले में भी अब काले आलू की खेती शुरू हो गई है। यहां के हेलटियागंज खंड के मुशहरवा गांव के एक किसान ने काले आलू की खेती की है। कृषि की माने तो सफेद आलू की तुलना में काले आलू की खेती किसानों के लिए लाभदायक हो सकती है। काले आलू की खेती से किसान सफेद आलू की तुलना में तीन से चार गुना ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं। सिर्फ इतना ही नहीं, सफेद आलू उनके लिए नुकसानदायक है, लेकिन काला आलू उनके लिए हानिकारक है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि आलू में एंटीऑक्सीडेंट और फ्लोरिक एसिड पाया जाता है।
हृदय और कैंसर प्रतिरोधक क्षमता से भरपूर है काला आलू
आलू के इस पहलू के बारे में हेल्टियागंज कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक अभिक पात्रा ने बताया कि सामान्य आलू की तुलना में काले आलू में कार्बोहाइड्रेट कार्बोहाइड्रेट की मात्रा 20 प्रतिशत तक कम होती है। ऐसे में मरीज़ भी इसका सेवन कर सकते हैं। पाए जाने वाले वाले कॉपर, मैग्नीज और स्ट्रॉबेरी जैसे औषधीय तत्व, हार्ट, आउटेज और अवशेषों के लिए हानिकारक हैं। खून की कमी से बैचलर रह रहे कारखाने के लिए यह संजीवनी से कम नहीं है। एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर काला आलू हमारे शरीर में कैंसर कोशिकाओं को बनने से रोकता है।
साधारण आलू से चार गुणा अधिक कीमत
किसान कहावत पिछले दो साल से काले आलू की सफल खेती कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि साधारण आलू की तुलना में काले आलू की कीमत करीब चार गुना अधिक है। उन्होंने इसका बीज महाराष्ट्र से मंगाया था और इसकी बटाई की गई थी। फ़सल ने तय समय में तैयारी की और अपने बचे हुए खेत में लगभग 500 किलोमीटर तक आलू की खेती की। वर्तमान में कमलेश इसकी बीज, बिहार के कई आभूषणों के किसानों के अलावा यूपी, झारखंड और असम तक के किसानों को भेज रहे हैं। वे अपनी खेती में सफल हो चुके हैं और अब अन्य किसानों से भी मदद लेना चाहते हैं। गौर करने वाली बात यह है कि काले आलू की सब्जी भी बिल्कुल जमुनी रंग की होती है, और इसका स्वाद सफेद आलू से बिल्कुल अलग होता है।
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पहले प्रकाशित : 2 दिसंबर, 2023, 20:46 IST
