Homeमनोरंजनउम्मीद है इस चाय का स्वाद...'ओशो' ने भी भरे हैं चुस्की, कीमत...

उम्मीद है इस चाय का स्वाद…’ओशो’ ने भी भरे हैं चुस्की, कीमत मात्र 5 रुपये


भरत तिवारी/जबलपुर. रियल के सीज़न की बात करें तो लोगों की जापान में चाय का नाम सबसे पहले आता है। और अगर वीआईपी शब्द का नाम आपने खरीदा है तो आपके दिमाग की फैशन लक्जरी चीजें ही आएंगी। जबलपुर संस्कारधानी के सिविल लाइन क्षेत्र के कोने में स्थित एक छोटी सी चाय की दुकान है जिसे लोग वीआईपी चाय की दुकान के नाम से जानते हैं।

यहां चाय का स्वाद तो अच्छा है लेकिन इसके अलावा इसकी एक और विशिष्टता है। यहां पूरे देश में कई लोग यहां चाय पीते हैं, जिनमें से एक विश्व प्रसिद्ध शिक्षक ओशो भी हैं।

वीआईपी है उनकी चाय लेकिन छोटी सी है दुकान
जबलपुर के सिविल लाइन क्षेत्र में स्थित यह दुकान देखने में काफी छोटी है, यहां पर आपको बड़े-बड़े वीआईपी होटल रेस्तरां या कैफे जैसी सुविधा नहीं मिलेगी। रेट की बात करें तो यहां चाय सिर्फ ₹5 की है लेकिन फिर भी यह चाय वाले पूरे संस्कारधानी में चाय वाले के नाम से मशहूर है, क्योंकि यह दुकान तो काफी छोटी है लेकिन इस दुकान पर आने वाले कदम इतने बड़े हैं कि देश विदेश के लोग उन कदमों के बारे में जानते हैं। विश्व प्रसिद्ध वास्तुशिल्प कलाकार ओशो, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय अर्जुन सिंह, राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वर्गीय शरद यादव और कई प्रदेशों के जाने-माने कलाकारों ने यहां चाय पी है। एक छोटी सी चाय की दुकान में चाय पीने के लिए बड़े-बड़े लोग दूर-दूर से यहां आबंटन हैं। इसलिए इस दुकान की चाय को लोग चाय के नाम से जानते हैं।

कौन थे संगीत ओशो
आर्टिस्ट म्यूजिकल ओशो को भगवान म्यूजिकल ओशो भी कहा जाता है। कहते हैं संगीतमय ओशो का जन्म 11 दिसंबर 1931 और मृत्यु 19 जनवरी 1990 को पुणे में हुई थी। ओशो का मूल नाम चंद्र मोहन जैन था, ओशो अपने विचारों के कारण पूरे विश्व में प्रसिद्ध थे, कहते हैं ओशो अपने युवा अवस्था वाले दिनों में जँबाल संस्कारधानी में रहते थे, कहते हैं संस्कारधानी के सिविल लायन्स में एक छोटी सी दुकान में स्थित वह रोजमर्रा की जिंदगी चाय पिया करते थे, लेकर आए थे जब हम दिग्गजों की इच्छाधारी जी से बात करते थे तो उन्होंने यह बात हमी स्टूडियो पर कही थी, उन्होंने बताया था कि कलाकार ओशो अपनी दुकान पर ज्ञान चाय पिया करते थे इसके अलावा देश की बड़ी दोस्ती ने भी इस दुकान पर ज्ञान चाय पी है.

टैग: खाना, भोजन 18, सड़क का भोजन



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