अभय विशाल/पारा : अपने जीवन में आप पेड़ तो बहुत होंगे। उनमें से कई पेड़ों का स्वाद आपको आज तक याद होगा. ऐसा ही कुछ हुआ है जब लोग महाराजगंज स्थित महाराज जी का ठेला लगा रहे हैं। स्वाद ऐसा कि कभी कोई चाहे कर भी भूल न जाए। स्वाद के कारण ही तीन जिलों के लोग इस पेड़ के दीवाने हैं। साथ ही पेड़ों की प्रकृति भी मंदिर की विशेष संरचना है। यह जानने वाली बात होगी कि इस ट्री की दुकान पर आज तीसरी पीढ़ी कम कर रही है। पिछले 50 वर्षों से महाराज जी की इस दुकान पर लोग लजीज व्यंजन खिलाते आ रहे हैं।
50 साल पुरानी है ट्रीका की दुकान
राहुल ने बताया कि ट्रीके की यह दुकान करीब 50 साल पुरानी है। सबसे पहले दादाजी ने इस दुकान की शुरुआत की थी और वे लोग शुद्ध खोया से तैयार करते थे। इस दुकान का ही मशहूर दिन-ब-दिन फेल हो गया। राहुल ने बताया कि ग्रामीण इलाकों के किसानों को प्रतिदिन शुद्ध दूध मिल जाता है। यहां रोजाना 20 किलो पेड़े की बिक्री होती है.इतना ही नहीं, यहां की दाल मिर्च भी बहुत मशहूर है. जो भी व्यक्ति यहां पेड़े लेने आता है वो पेड़े के साथ दाल का मिश्रण भी जरूर खरीद कर ले जाता है।
400 रुपये किलो शुद्ध पेड़ा
राहुल ने बताया कि यहां का स्वाद और स्वाद यहां के लोगों को काफी पसंद आता है। छपरा, सीवान और गोपालगंज जिले के लोग यहां के पेड़ के दीवाने हैं। यहां मिलने वाले पेड़े की कीमत 400 प्रति किलो है जबकि दाल मिक्चर की कीमत 200 प्रति किलो है। इस काम के जरिए राहुल ने कई लोगों को रोजगार भी दिया है. यहां ट्रीका बनाने का काम कर रहे कारीगर ने बताया कि ट्रीका बनाने में करीब दो से तीन घंटे का समय लगता है। राहुल ने बताया कि इस पेड़ की दुकान से महीने भर में लगभग हजार रुपए कमाते हैं।
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पहले प्रकाशित : 3 दिसंबर, 2023, 12:42 IST
