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‘भारत जोड़ो यात्रा’ का कितना हुआ असर? हिंदी बेल्ट में कांग्रेस की हार, लेकिन उम्मीद की किरण दिखी तेलंगाना


नई दिल्ली. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की अवतरण वाली ‘भारत जोड़ो यात्रा’ ने पार्टी स्टॉकहोम और संगठन में नई कंपनी का संचार किया है, हालांकि अब तक इसका असर देखने को मिल रहा है। यात्रा के बाद कर्नाटक और तेलंगाना के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली सफलता से लेकर मध्य प्रदेश और राजस्थान में हार का सामना करना पड़ा। यह यात्रा उत्तरी राज्यों से गुजराती थी। छत्तीसगढ़ कांग्रेस भी हार गई, लेकिन इस राज्य से यात्रा नहीं की थी।

मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में 7 से 30 नवंबर के बीच वोटिंग हुई और वोटों की गिनती रविवार को हुई। कांग्रेस ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव में पार्टी की सफलता का एक बड़ा श्रेय ‘भारत जोड़ो यात्रा’ दिया था। ‘भारत जोड़ो यात्रा’ जिन 20 विधानसभा क्षेत्रों से गुजरी थी, उनमें से 15 में कांग्रेस को जीत हासिल हुई।

यात्रा कई दिनों तक मध्य प्रदेश और राजस्थान में रही थी, लेकिन इसका असर ज्यादा नहीं हुआ। पूर्व नेता कांग्रेस और राजनीतिक टिप्पणीकार संजय झा ने कहा कि ‘भारतो यात्रा’ के लिए कांग्रेस और राहुल गांधी दोनों ‘परिवर्तनवादी’ बने हुए हैं।

उन्होंने ‘पीटीआई’ से कहा, ‘इस यात्रा ने विरासत और शिक्षा को प्रेरित करने में मदद की।’ ‘राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के आज के नतीजे हमें बताते हैं कि बढ़ती युवाओं की धारा अब और अधिक स्पष्ट हो रही है…दुर्भाग्य से, न तो कांग्रेस और न ही लोकतंत्र ने भाजपा के धार्मिक कार्ड का जवाब देने की कोशिश की है।’

राहुल गांधी की अगुआई में कांग्रेस ने पिछले साल सात सितंबर को तमिलनाडु की कन्याकुमारी से ‘भारत जोड़ो यात्रा’ निकाली थी। करीब 4 हजार किमी की पदयात्रा का इस साल 30 जनवरी को श्रीनगर में समापन हुआ था।

टैग: विधानसभा चुनाव, भारत जोड़ो यात्रा, कांग्रेस, राहुल गांधी



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