रामकुमार नायक/रायपुरः सनातन धर्म में व्रत और पूजन कार्य को विशेष माना गया है। कालभैरव को शिव का पांचवा अवतार माना गया है। कालभैरव आपराधिक घटनाओं पर नियंत्रण करने वाले भयंकर दंडनायक हैं, ये अपने समर्थकों की हमेशा रक्षा करते हैं। कहा जाता है कि भगवान भैरव के भक्तों का अनिष्ट करने वालों को तीर्थ लोकों में कोई शरण नहीं मिल सकती। काल भी रहता है, इसलिए काल भी कहा जाता है. हर साल कालाष्टमी के दिन बाबा काल भैरव की विशेष पूजा करने से जीवन से सभी संकट, काल, दुख दूर हो जाते हैं। इस बारकालाष्टमी 5 दिसंबर दिन मंगलवार को मनाया जाएगा।
कालाष्टमी को लेकर राजधानी रायपुर के ज्योतिषाचार्य पंडित मनोज शुक्ला ने बताया कि कालीअष्टमी को हर मास की अष्टमी को अलग-अलग तरह से मनाया जाता है, जैसे कि नवरात्रि पर्व में दुर्गा अष्टमी, भादों मास की अष्टमी को कृष्ण अष्टमी और अगहन मास की अष्टमी को काल भैरव जयंती या काल भैरव अष्टमी के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन भगवान कालभैरव का प्राकट्य हुआ था, इसलिए कालभैरव की जयंती के रूप में बनाये गये हैं।
जिन स्थानों पर सिद्ध पीठ, शक्ति पीठ के साथ भैरव मंदिर हैं, उन सभी स्थानों में भैरव जी की जयंती मनाई जाती है। इसलिए इस दिन भैरव की विशेष पूजा की जाती है। पंडित मनोज शुक्ला ने आगे बताया कि गुप्त शत्रुओं से रक्षा करने के लिए और बाहरी शक्तियों का नाश करने के लिए भगवान भैरव की पूजा की जाती है। इसलिए हर व्यक्ति को इस दिन किसी शक्ति सिद्ध पीठ मंदिर में विक्रेता पूजा साज-सज्जा करानी चाहिए।
सात्विक मंत्रों के साथ करें अर्पण
इस दिन भगवान भैरव की सात्विक मंत्रों से पूजा की जाती है। कहीं-कहीं अलौकिक वैदिक साधना भी प्रचलित है। सात्विक पूजा करते हुए भगवान भैरव को उड़ाद से बने हुए बड़ा, मूंग का बड़ा और इमरती मिठाई का किरदार निभाया जाता है। इससे भैरव बाबा आकर्षक होते हैं।
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पहले प्रकाशित : 4 दिसंबर, 2023, 17:02 IST
