Homeहेल्थ & फिटनेससमुद्र तट में ही बुजुर्गों की सबसे अधिक मित्रताएं होती हैं? ...

समुद्र तट में ही बुजुर्गों की सबसे अधिक मित्रताएं होती हैं? एम.एम. के पूर्व निदेशक से जानें


उत्तर

भारत ही नहीं दुनिया में भी 40 फीसदी की बढ़ोतरी!
किसी भी बीमार व्यक्ति को इस मौसम में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

सर्दी के मौसम में बुजुर्गों की मौत: आपने अपने आस-पास देखा और अनुभव किया होगा कि सर्दियां आते ही बुजुर्गों के देहांत की खबरें बढ़ जाती हैं। नवंबर से लेकर जनवरी तक इन तीन महीनों में 70 से ऊपर वाले किसी बीमारी से यात्रा कर रहे हैं या होली पर दिखाई दे रहे बुजुर्ग भी अचानक अपनी अंतिम यात्रा पर निकल रहे हैं। ऐसा सिर्फ भारत में ही नहीं होता, बल्कि दुनिया के ज्यादातर देशों में ठंड का मौसम बुजुर्गों पर भारी पड़ता है।

एक अध्ययन के अनुसार, देश में समुद्र तट पर रहने वाले पर्यटकों की संख्या में लगभग 40 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है, लेकिन अगर आप सोच रहे हैं कि ऐसी पतली जांघें क्यों होती हैं, तो आपको बताएं कि ऐसा नहीं है। ठंड के मौसम में ठंड लगने की वजह से सिर्फ कुछ लोगों की होती है मौत, इस मौसम में ठंड लगने की सबसे बड़ी वजह हैं ये 3 बड़ी बीमारियां।

ये भी पढ़ें- इन्फ्लूएंजा फ्लू: तेजी से बढ़ती जा रही है ठंड मौसमी फ्लू, जान लें लक्षण और बचाव के उपाय

ऑल इन इंडिया इंटरनेशनल ऑफ मेडिकल साइंसेज नई फ़िलहाल के पूर्व निदेशक डॉ. महेश चंद्र मिश्र कहते हैं कि नवंबर से लेकर जनवरी तक 3 महीने में सिर्फ बुजुर्गों को ही नहीं बल्कि किसी भी बीमारी से पीड़ित रहने वाले सभी उम्र के लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। इस मौसम में अधिकांश स्तनपायी सदन डेथ यानी अचानक मौत के दृश्य सामने आते हैं। ऐसा 3 प्रमुख चुनौती की वजह से होता है..

डॉ. मिश्रा का कहना है कि इस मौसम में चमत्कारी रोग जैसे कार्डिएक अरे पिरामिड, रेस्पिरेटरी रोग जैसे कि त्रिकोणीय पीडी, ऑर्थोमा अटैक या निमोनिया और पैरा बसिप या डायरेमिक-ब्रेन हेमरेज़ की वजह से होते हैं। डेट का सीज़न इन तीनों में ही बेरोजगारी बढ़ती है। यदि कोई पहले से ही किसी बीमारी से पीड़ित है तो उसे ठंड लग सकती है।
हालाँकि घरों से बाहर और सड़कों पर रहने वाले लोगों की मृत्यु सबसे अधिक हाइपोथर्मिया यानी ठंड लगने से होती है। प्रोटोकाल खबरें

वृद्धाश्रम के सबसे पुराने दोस्त?

डॉ. मिश्र अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि 60 से ऊपर की आबादी में लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। इसके अलावा शरीर की स्थिति ऐसी होती है कि न तो ठंडा रहना और न ही इतनी अधिक गर्मी पड़ना कि लोगों का शरीर सहन कर पाता है। इस उम्र तक आते-आते ये किसी न किसी अंतरराष्ट्रीय बीमारी से उबरते रहते हैं, जो इस उम्र में और ठंड के मौसम में ठंड के मौसम में या तो फिर से ठंडा या गंभीर हो जाता है और साहस का स्तर बढ़ जाता है।

युवाओं को भी खतरा

ऐसा नहीं है कि ठंड का खतरा सिर्फ एक बार ही होता है, किसी भी बीमारी से पीड़ित रहे युवा भी इस मौसम में विशेष सावधानी बरतें। यदि वे हाई शोरूम में बंद हैं या व्यापारी से बातचीत कर रहे हैं तो डीजल का समुद्री नुकसान हो सकता है।

डिज़ाइन कैसे करें?

डॉ. मिश्र कहते हैं कि इस मौसम में हाई बीपी और मरीजों की बीमारी को नियंत्रित रखें। इस सीज़न में नसें नाटकीय चट्टानें और ख़ून की वास्तुकला की चट्टानें होती हैं, जिनका प्रभाव दिल पर पड़ता है और दिल का दौरा इस सीज़न में जल्दी दिखता है, इसलिए पर्या गुप्त असायम या सैर-फिरना करें। अगर हार्ट, रेस्पिरेटरी रोगी के मरीज पहले से दवा खा रहे हैं तो नियमित रूप से सेवन करें, समय पर डॉक्टर की सलाह लें रहें। बुजुर्ग लोगों को ठंड के एक नोजलपोजर से बचाएं। घर को गर्म रखने के लिए लेकिन वायुमंडलीय आवश्यक रूप से रखने के लिए ऑ सपोजिटरी पर्या मात्रा में मिलते हैं। हाइपोथर्मिया से बचने के लिए जरूरी है कि विशेष रूप से रात के समय होने वाली ठंड से बचाव रहे। गर्म नाश्ते का सेवन करें.

रोजाना करें ये तीन काम

. ठंड के मौसम में जलन गर्म या ठंडा, पानी जरूर पीएं। दिन में दो लीटर पानी जरूर पीएं।
. रोज़ रोज़ 20 मिनट ही करें, अवश्य चलें। योगासन और अस्तायाम भी करें तो और भी अच्छा है।
. अगर किसी बीमारी की दवा खा रहे हैं तो थोड़ी-थोड़ी देर बाद उसे लें।

ये भी पढ़ें- ट्रांसजेंडर्स के लिए एम

टैग: स्वास्थ्य, दिल का दौरा, जीवन शैली, ट्रेंडिंग न्यूज़, सर्दी



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Must Read

spot_img