रीते कुमार/समस्तीपुर. ठंड की शुरुआत ही होती है तिलकुट की महक से बाजार में। दिसंबर माह की शुरुआत में ही तिलकुट का निर्माण और बिक्री की शुरुआत होती है। हालाँकि इसकी कीमत अन्य मिठाइयों से काफी अधिक है। जबकि खोवा और छेना की मिठाई 200 से 250 रुपये प्रति किलो बिकती है, तिलकुट 300 से 450 रुपये प्रति किलो बिकती है. ठंड के साथ ही लोग तिलकुट की खरीदारी करना शुरू कर देते हैं। इसमें विशेष निर्माण प्रक्रिया शामिल है, जिसमें लोहे की कुटनी से कूट-कूटन बनाया जाता है।
मकर संक्रांति पर संक्रांति काफी विनाशकारी है
दिसंबर महीने से ही तिलकुट की बिक्री शुरू हो जाती है, लेकिन मकर संक्रांति पर इसकी बिक्री और भी बढ़ जाती है। इस मशीन पर घर में बने रहें और तिलवा के साथ, बाजार में बने तिलकुट को लोग अपने रिश्तेदारों के घर में रहना पसंद करते हैं। इसका स्वाद काफी अच्छा होता है और मकर संक्रांति से पहले यह परंपरा की परंपरा है। इस बार लोगों के डिजायन के साथ-साथ इसकी कीमत भी बढ़ गई है। अब तो 300 से 450 रुपए प्रति बिकता है, लेकिन मकर संक्रांति से पहले यह और भी महंगा हो सकता है।
खोया, चीनी और गुड़ से बने तिलकुट
बातचीत के दौरान तिलकुट शिल्पकार अवैध्य प्रसाद ने बताया कि ठंड के साथ ही तिलकुट की बिक्री तेजी से हो रही है। यहां खास तौर पर चीनी और गुड़ से तिलकुट बनाया जाता है। चीनी वाला तिलकुट काफी मीठा होता है और गुड़ वाले तिलकुट की मिठाई कम होती है। समूह वाले लोग बार-बार गुड़ वाले तिलकुट को पसंद करते हैं। उन्होंने बताया कि यहां खोया, चीनी और गुड़ से तिलकुट बनाए जाते हैं और इसमें 5 से 7 वेराइटी शामिल होती हैं, जिनमें अलग-अलग डिजाइन होते हैं. हमारे यहां चीनी वाले तिलकुट का रेट 300 रुपये प्रति किलो है, जबकि खोये वाले का रेट 450 रुपये प्रति किलो है. चीनी और गुणवत्ता वाले तिलकुट की मांग लोगों में अधिक है।
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पहले प्रकाशित : 6 दिसंबर, 2023, 15:55 IST
