ओपीपी/सोपानकोरबा. भगवान नारायण का प्रिय मार्ग शीर्ष को माना गया है। इस माह में कई ऐसे व्रत आते हैं, जिनमें पुरानी पूजा की जाती है। इन व्रतों में से एक मोक्ष मुक्ति भी है। इस दिन नारायण भगवान की पूजा करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और पितरों को भी मोक्ष की प्राप्ति होती है। माघ मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को यह व्रत व्यक्ति के जीवन में सभी को सुख देता है और नरक में यातना सह कर रहे पितरों को मोक्ष प्रदान करता है। क्या है इस व्रत के पीछे की कहानी, सीताफल लेकर ज्योतिषाचार्य पंडित महंत मौलवी से बातचीत की।
ज्योतिषाचार्य पंडित बंदरबाइक ने बताया कि एक बार वैखानस नाम के राजा बताए गए थे। उन्होंने सपने में देखा कि, उनके पूर्व नरक में बहुत ही यातना झेल रहे हैं। प्रातःकाल ही उन्होंने अपने दरबार में पुरोहितों को बुलाया और स्वप्न का अर्थ पूछा।
इसके पीछे की पूरी कहानी
राजपुरोहितों ने राजा को इस समस्या के समाधान के लिए ऋषि पर्वत मुनि के पास जाने की सलाह दी। राजा ऋषि पर्वत मुनि के पास जाते हैं और अपने सपनों के बारे में बताते हैं पितरों के मोक्ष प्राप्ति के उपाय। ऋषि कुछ देर के लिए अपने बंद कर लेते हैं, और फिर शिष्यों के पास जो पाप चले जाते हैं। उन्हें अपना रिजल्ट नर्क में यातनाए सहनी पड़ रही है। राजा द्वारा पूर्णिमा उपाय पर ऋषि ने उन्हें बताया कि माघ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोक्ष का व्रत करने से उनकी मोक्ष प्राप्ति होगी। ऋषि मुनि के अनुसार, राजा ने अपनी पत्नी, बच्चों और रिश्तेदारों के साथ बड़ी श्रद्धा का व्रत रखा। इससे भगवान विष्णु की मूर्ति बनाई गई और उनके मोक्ष को मोक्ष प्रदान किया गया।
इस तिथि को पड़ रहा व्रत
ज्योतिषाचार्य ने बताया है कि मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 22 दिसंबर को प्रातः 08 बजकर 16 मिनट से प्रारंभ होगी और 23 दिसंबर को प्रातः 07 बजकर 30 मिनट तक इस तिथि की समाप्ति होगी। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार 22 दिसंबर को ही मोक्षदा एकादशी मनाई जाएगी।
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पहले प्रकाशित : 6 दिसंबर, 2023, 14:36 IST
