उत्तर
चीन के अलावा 11 कम्युनिस्ट देशों में कम्युनिस्ट नाइजीरिया के केसेज मिल रहे हैं।
यूरोप- अमेरिका सहित कई देश चीन से इस बीमारी के बारे में जानकारी मांग रहे हैं।
भारत में चीन निमोनिया के मामले: भारत के पड़ोसी देश चीन में एक बार फिर हाहाकार मच गया है। यहां रहसयमयी निमोनिया कहे जा रहे इन्फ्लूएंजा ए वायरस के सब-प्लाट HP9N2 का खतरा देखने को मिल रहा है। सामने आए कई देशों में भी इस वायरस के मामले सामने आ रहे हैं. इसके कोविड-19 महामारी को लेकर किसी तरह से बच गए छोटे आ रहे हैं, ऐसे में चीन से आए कोरोना को झेलने के बाद भारत में इस बीमारी के संक्रमण के खतरे की संभावना भी जताई जा रही है लेकिन अब तक भारत के बारे में पता नहीं चल पाया है गोदामों पर गोदाम रखा जा रहा है? असल में यह बीमारी कंपनी के बाद डेमोक्रेटिक स्टेट और अब भारत में निजीकरण जा रही है? आइए जानते हैं कहते हैं देश के हेल्थ एक खंड…
नई फ़िन्फ़ के ऑल इन इंडिया इंटरनेशनल ऑफ मेडिकल साइंसेज के पूर्व निदेशक और जाने माने संस्था डॉ. एमसी मिश्र कहते हैं कि कोरोना के बाद यह समझ में आया कि कोई भी बात वायरल इनफेशन या वायरस का प्रसार मुश्किल है। इसका पुरालेख नहीं होता. यदि यह एक देश में फैला हुआ है, तो इसे अन्य देशों में कोई प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता है, अब उद्यमियों के बीच देशों के बीच की दूरी कम हो गई है, जबकि अन्य देशों में अंतर्राष्ट्रीय साज-सज्जा भी बहुत बढ़ गई है।
चीन में लगातार बढ़ रहे केस
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान पल्मोनरी क्रिटिकल केयर एंड मेडिकलीप मेडिसिन के अध्ययन प्रो. अनंत मोहन कहा जाता है कि चीन के एक हिसासे में इस सिगरेट के मामले में सिगरेट के मामले देखे जा रहे हैं। ऐसी घटनाएं हो रही हैं, इसका कारण अभी पता नहीं चला है लेकिन यह कोई नया बैग या वायरस नहीं है। यह पहले से मौजूद है और इसके केस पहले भी आ रहे हैं।
असली भारत में आभूषणों पर खतरे की घंटियाँ?
इस बारे में डॉ. मिश्र का कहना है कि एक बात जो इन मामलों में देखी जा रही है वह यह है कि चीन में धूम्रपान के ज्यादातर मामलों में मरीज मिले हुए हैं। वहां बड़ों में मैक इन्फ़ेक्शन देखने को नहीं मिल रहा है। ऐसे में जहां तक भारत में सामानों पर खतरे का सवाल है तो यहां पैनिक की जरूरत नहीं है और इस वायरस के बुरे प्रभाव का खतरा भी कम है। इसकी तीन वजहें हैं…
.पहला है कि जो भी इन्फ्लूएंजा ए वायरस का सब प्रकार H9N2 के केस चीन में आ रहे हैं, उसमें देखा जा रहा है कि संक्रमण दर तो है लेकिन मृत्यु दर काफी कम है। इससे जुड़े लोगों में इंफेक्शन जल्दी हो रहा है लेकिन फिर भी वे ठीक हो रहे हैं। अगर यह भारत में भी मौजूद है तो इस बीमारी का इलाज संभव है।
. दूसरा यह है कि भारत में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आतिशबाज़ी में दिलचस्पी नहीं है। ऐसे इंस्टालेशन में यह एक नॉनवेज पोजर कम होने की आशा है। सीओवीआईडी में देखा गया कि लोग स्टोरेज के मध्योग्यम से यह बीमारी की चपेट में आ गए और यह वायरस हर जगह फैल गया। यह अव्यवस्थित भी था.
. तीसरा है कि पार्टियो में रोग साइन क्षमता अधिक पाई जाती है और भारत में डमफ्लूएंजा फ्लू इन फैमिली के वायरस से पार्टियाँ पार्टियाँ होती रहती हैं, जिससे उनकी इम्युनिटी हलके इन्फे ब्लास्टन्स के लिए तैयार रहती है। कोविड में भी लोग बहुत प्रभावित नहीं हुए थे, ऐसे में इस बार भी इसकी संभावना कम है.
डॉ. मिश्र कहते हैं, यद्यपि फिर भी मुक्ति का उपाय बने रहना होगा। कोविड वाला अस्तित्वहार अगर अपनाते हैं तो घाटा नहीं है, फायदा ही है। ताकि चीन में जो स्थिति हो वह भारत में न हो।
बाकी देशों में उठ रही ये मांग
बता दें कि चीन में असली रहसयमयी सिगरेट जैसे कुछ बाकी मामले देशों में भी दिखते हैं। डेनिश और नीदरलैंड में भी ऐसे संक्रमण के मामले देखे जा रहे हैं. डेनिश के स्मार्तटेन्स सीरमातीत का कहना है कि केसेज की खासियत को देखते हुए इसे महामारी कह सकते हैं। वैश्विक ख़बरों के अनुसार यूरोप, अमेरिका, स्विट्ज़रलैंड और स्विट्ज़रलैंड और स्विट्ज़रलैंड के कुछ भी मामले देखे जा रहे हैं। इन स्टेट का आरोप है कि चीन इस बीमारी के बारे में सही डेटा उपलब्ध नहीं करा रहा है।
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पहले प्रकाशित : 6 दिसंबर, 2023, 14:18 IST
