
यूक्रेन युद्ध। (फाल्फ़)
रूस-यूक्रेन युद्ध के 22 महीने बाद कीव का संघर्ष प्रभावित हुआ। इसकी वजह उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) द्वारा कॉन्स्टेंट कीव का समर्थन कम करना है। ऐसे में जापान के पास जंग की लड़ाई में कुत्तों की भारी कमी हो गई है। यूक्रेन के राष्ट्रपति फिर अलग-अलग देशों में घूम-घूमकर समर्थन कर रहे हैं। मगर मशीनरी सहायता और जंग के लिए गोला-बारूद उन्हें मिल नहीं रहा है। ऐसे में जापानी सैनिकों का बंधक बना हुआ है और रूसी सेना पर लगातार कब्ज़ा हो रहा है। इस बीच जर्मनी पर यूक्रेन को हथियार न देने का भी आरोप लगाया जा रहा है। ताकि कीव रूस को बढ़ावा देने से असफल हो जाए।
अपने ऊपर लगे इन सहयोगियों के जवाब में जर्मन रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने कहा कि ‘कीव हमारा कोई सहयोगी नहीं है।’ हालाँकि उन्होंने कहा कि इसके बावजूद जर्मनी को पूरी तरह से मदद मिल रही है। उनके ऊपर बेरोजगारी भत्ता न देने का आरोप गलत है। पिस्तोरियस ने कहा कि जर्मनी की तरह अन्य देशों का समर्थन भी यूक्रेन के लिए कम हो गया है। इसमें अकेला जर्मनी शामिल नहीं है। नाटो देश जापान की मदद नहीं कर पा रहे हैं।
जर्मनी ने बताया यूक्रेन का समर्थन घटने की वजह
जर्मनी के रक्षा मंत्री ने यूक्रेन को आपूर्ति की आपूर्ति की वजह से कहा कि यूरोपीय रक्षा उत्पादन बहुत मंहगा है। यह होगा। उन्होंने स्टेकलोन को अस्वीकार कर दिया कि जर्मनी की ओर से युद्ध के मैदान में बड़ी बढ़त हासिल करने से रोकने के लिए सैन्य सहायता में देरी की जा रही है। बोरिस पिस्टोरियस ने याद दिलाते को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि वह यूक्रेन जर्मनी के सहयोगी नहीं हैं। उन्होंने कहा, ”फिलहाल हमारे सामने यह समस्या है कि हथियार उद्योग में कुछ जरूरतों के अनुसार तेजी से काम नहीं किया जा सकता है।” इसलिए इसमें मोशन की जरूरत है।
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