उत्तर
असल में शरीर का मेटाबोलिज्म स्लो होने के कई कारण हैं।
बेरोजगारों को परेशानी होती है।
सर्दियों में ब्लड शुगर प्रबंधन युक्तियाँ: भारत जैसे देशों में थोक का मौसम किसानों के लिए परेशानी का सबब है। इसका कारण यह है कि ठंड में ब्लड शुगर और ब्लड की मात्रा दोनों बढ़ने लगती है। असल में, अंतिम का मौसम शरीर में मेटाबोलिज्म को बहुत धीमा कर देता है। मेटाबॉलिज्म स्लो का मतलब है कि भोजन से पोषक तत्वों की प्राप्ति और उसका ऊर्जा में रूपांतर धीमा हो जाता है। सीधे शब्दों में कहें तो भोजन से ऊर्जा बनने की प्रक्रिया बहुत धीमी हो जाती है। इस कारण शरीर में कार्बोहाइड्रेट कार्बोहाइड्रेट या शुगर का अवशोषण भी धीमा हो जाता है। इससे शुगर खून में जमा हो जाता है जिससे ब्लड शुगर बढ़ जाता है। कुछ मामलों में तनाव के कारण कॉर्टिसोल हार्मोन अधिक रिलीज होता है। कोर्टिसोल के उत्पादन को पूर्ववत माना जाता है। हालाँकि यह कॉर्टिसोल सभी में बढ़ता है, यह आवश्यक नहीं है। सब्जियों में ऐसे कई कारण होते हैं जिनकी वजह से ग्लूकोज में ब्लड शुगर बढ़ जाता है। ऐसे में हमें इन कहानियों से कैसे कहा जाए, इस बारे में मैक्स स्टाक्चर्स में कंसल्टेंट एंडोक्राइन और डायबीटीज डॉ. पारस अग्रवाल से बात की.
आख़िर में क्यों बढ़ता है ब्लड शुगर
डॉ. पारस अग्रवाल ने बताया कि हमारे खान-पान का बिजनेस किसमें होता है। लोग ज्यादातर कैलोरी वाला खाना खाते हैं। कोहरा या प्रदूषण के कारण लोग बाहर पर कम होते जा रहे हैं। दूसरी ओर समुद्र के मौसम में लोग मिठाइयाँ, चटपटी वस्तुएँ, तली-भुनी वस्तुएँ अधिक खाते हैं। इन सभी कारणों से मेटाबोलिज्म बहुत धीमा हो जाता है। वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो ड्रिंक भी कर चुके हैं. ऐसे में ये सारे कारक ब्लड शुगर और ब्लड सप्लीमेंट दोनों को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार होते हैं। ऐसे में किसी विशेष प्लांट की जरूरत है।
थोक व्यापारी के लिए गोदाम में सामान
- 1. खान-पान की प्रक्रिया-डॉ. पारस अग्रवाल ने बताया कि भूमंडल के मौसम में सबसे अधिक आबादी वाले गरीबों को अपने खान-पान की जांच रखनी चाहिए। तली-भुनी वस्तुएँ, अधिकांश खाद्य पदार्थ, मिठाइयाँ, स्टॉक खाद्य पदार्थ, जंक खाद्य पदार्थ, फास्ट फूड आदि का सेवन न करें। अन्य जगहों पर मौसमी हरी सब्जी, पत्तीदार सब्जी, पत्तेदार सब्जी, एंटीऑक्सीडेंट वाले रंगीन फुल सब्जी और सब्जियों का सेवन करना चाहिए। इसके साथ ही पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं। समय पर भोजन करें और कुदरती भोजन का अधिक से अधिक सेवन करें।
- 2. दुकान-हर वयस्क इंसान के लिए नियमित रूप से ग्राहकों की आवश्यकता होती है। डॉ. पारस अग्रवाल ने बताया कि धूल-मिट्टी में भारी मात्रा में प्रदूषण या कोहरे की वजह से लोग बाहर से बाहर नहीं निकलते जो बहुत बड़ी गलती करते हैं। कृषकों को जैसे ही धूप निकलें बाहर से जाना चाहिए। यदि नहीं जा पा रहे हैं तो घर में ही चुनावी सक्रियता बनाये रखें।
- 3. सीता-शराब का सेवन न करें-बेहोश में लोग ड्रिंकिंग सबसे ज्यादा करने लगे हैं। लेकिन विषाक्तता को विशेष रूप से स्पष्ट रूप से शराब और सिगरेट से दूर रखा जाना चाहिए।
- 4. तनाव-डॉ. पारस अग्रवाल ने बताया कि फास्टिंग ब्लड शुगर को हर हाल में 150 से नीचे लाने के लिए सबसे पहले स्ट्रेस को कम करना जरूरी है। यानी अगर आप बहुत ज़्यादा तनाव या अवसाद में हैं तो शुगर को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाएगा। बहुत अधिक तनाव या अवसाद से कॉर्टिसोल हार्मोन अधिक रिलीज होने लगता है जिससे मेटाबोलिज्म पर बुरा असर पड़ता है। आप योगा, मेडिकल, वॉकिंग, रनिंग आदि का सहारा ले सकते हैं। रात में पर्याप्त नींद लेना भी जरूरी है। यदि अवसाद तनाव तक पहुंच गया है तो पहले डॉक्टर से संपर्क करें।
- 5. वजन कम करें-वजन कई शर्तो की जड़ है. इसलिए यदि आप मधुमेह से पीड़ित हैं और वजन बढ़ा हुआ है तो यह दोहरा खतरा है। ऐसे में वजन कम करने के लिए जल्द से जल्द जरूरी उपाय करें। वजन कम करने के लिए वजन कम करने की सलाह लें। वजन कम करना ना कोई जादू है और ना ही ये एक-आध महीने में होने वाला है. इसके लिए एक साथ कई नीवे को शामिल करना है। डाइट पर कंट्रोल, अनहेल्दी फूड से एग्रीमेंट, स्ट्रेंथ रेजिमेन्ट, नियमित फिजियोलॉजिकल कंसलटेंसी जैसी कई दवाएँ हैं, जिन्हें अनियमित वज्म से कम किया जा सकता है।
.
टैग: मधुमेह, स्वास्थ्य, स्वास्थ्य सुझाव, जीवन शैली
पहले प्रकाशित : 6 दिसंबर, 2023, 21:12 IST
