कपिल/शिमला। पशुचिकित्सा से जुड़ी बीमारी है, जिसका कोई स्थायी इलाज नहीं है। यह बीमारी तब होती है, जब आपके शरीर का अंग अग्नाशाय नामक हार्मोन को बंद कर देता है या काम बनाता है। दरअसल, यह हार्मोन खून में ब्लड शुगर को नियंत्रित करता है। अगर आप भी इस बीमारी के बारे में जानना चाहते हैं और कुछ मीठी या जलेबी नहीं खा रहे हैं तो आज हम आपको ऐसी जलेबी के बारे में बताने जा रहे हैं। जिससे आपके काम पर कोई असर नहीं होता है।
हिमाचल प्रदेश के किन्नौर में स्टीवन जलेबी बनाई जाती है, इसे ओगला अटैची से बनाया जाता है। जिसमें मेंथी का भी प्रयोग किया जाता है. गेहूं, जौ, राय और जय की तुलना में ओगला अपार्टमेंट में अधिक प्रोटीन पाया जाता है। बता दें कि दूध और अंडे की जर्दी से मिलने वाले पोषण के बराबर एमिनो एसिड होता है, जो अन्य अनाजों में नहीं होता है।
जलेबी खाने के फायदे….
जलेबी बनाने वाले अटल ने बताया कि मीठी जलेबी लोगों को बहुत पसंद आती है, लेकिन आज के दौर में लोग व्यंग्य से काफी परेशान रहते हैं. मिठाई से लोग दूरी बनाते हैं, लेकिन ये तीखा जलेबी ना तो आपके शरीर के लिए नुकसानदायक है, ना स्वाद में आप निराश हो जाएंगे। उन्होंने इस जलेबी के फायदे के बारे में भी बताया.
1. रामबाण के लिए बेरोजगारी
एमाइलोपेक्टिन और स्टैटिन की तुलना में एमाइलोज अच्छी मात्रा में होता है। सहकर्मियों से बातचीत के लिए इसका स्वाद बेहद खराब होता है।
2. कैंसर-हार्ट डिजीज में भी काफी कमाल है
ओगला में लिपिड कम होते हैं और ओलिक और लिनोलिक जैसे असंतृप्त टीबी एसिड काफी मात्रा में होते हैं। जो दिल के दौरे, कैंसर, सूजन और मधुमेह के खिलाफ स्वास्थ्य लाभ पहुंचाते हैं। इसमें विटामिन, खनिज, कैल्शियम, मैग्नीशियम, जस्ता, पाइरिडोक्सिन, फोलेट बड़ी मात्रा में पाए जाते हैं।
3. सटीक से संबंधित लोग भी सेवन करें
इसमें आहारीय संस्थागत संस्थागत अनाज से अधिक या उनके बराबर होता है। जिसमें 5 प्रतिशत कच्चा आहार और 2-3% अघुलनशील आहार शामिल है। जो फॉर्म और फॉर्म के खिलाफ काम करता है।
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पहले प्रकाशित : 6 दिसंबर, 2023, 14:30 IST
