नई दिल्ली। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्युरो की रिपोर्ट में इस बार कई चौकाने वाले खुलासे हुए हैं, जिनमें एक खुलासा उन साथियों को लेकर है, जहां हाथ संगीन में दुष्टों के बारे में पता चला है। संगीन अपराधी में झूठ बोलने वाले कुछ लोग इस कदर खोखला हो गए हैं कि अब उनके हाथ कटने में भी कोई फर्क नहीं पड़ता। जी हां, नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्युरो (मैडमबी) के डेज डेज की आई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि डेज साल करीब 820 हा पुअटैन्स के वलीहालों द्वारा दर्शाए गए हैं।
पीडीएफ की रिपोर्ट के आधार पर अगर हम वास्तुविदों की बात करें तो महासाइंटेंट एक ऐसा साजिशकर्ता है, जहां पर सबसे ज्यादा 154 हत्याओं की व्यवस्थाओं को भिक्षुकों ने अंजाम दिया है। महासत्यापित के ऐसे जिले की बात करें, जहां सबसे ज्यादा हत्याएं मद्रास की हैं, उस जिले का नाम पुणे है। पुणे में 13 हत्या के व्यापारियों ने अंजाम दिया। इसके अलावा, नाबालिगों द्वारा हटिया के अहमदनगर से 5, अमरावती से 6, किले से 5, जालना से 6, मुंबई से 9, नागपुर से 15, नांदेड़ से 6, नंदुरबार से 7, नासिक से 12, ठाणे से 9, पिंपरी चिंचवड़ से 7 और विरार से 5 मामले सामने आए हैं.
वह शहर के जहां के सामाने हैं सबसे ज्यादा पसंद ‘खूंखार’
फेसबुक की रिपोर्ट के आधार पर हम उस शहर की बात करते हैं जहां पर नाबालिगों ने सबसे अधिक हत्या की बात कही है तो उस शहर का नाम गुंगेर है। बिहार के सेंचुरी एसोसिएशन में 17 विश्वविद्यालयों के सबसे बड़े कर्मचारियों को मौत की सजा दी गई है. वहीं, पूरे बिहार की बात करें तो सेंचुरी के छह अलग-अलग हिस्सों से लेकर हत्या तक के करीब 35 छात्रों की रिपोर्ट सामने आई है। इसके अलावा, मोतिहारी शहर में भी ग्रैंडमास्टरों ने हत्या के 10 विश्वविद्यालयों को प्रभावित किया है। वहीं अपराधियों की बात करें तो बिहार में करीब 887 अपराधियों को अपराधियों ने अंजाम दिया है.
इस शहर के वाद्ययंत्रों से सबसे ज्यादा लोकप्रिय ‘आतंक’
वहीं, उस शहर की बात है, जहां के मस्जिदों ने सबसे ज्यादा वर्सों को अंजाम दिया हो, तो उस शहर का नाम जाना जाता है। चेन्नै में सबसे ज्यादा 475 नौकरानियों को नौकरी से निकाला गया है। इनमें हत्या, हत्या का प्रयास, महिलाओं के साथ अपराध, चोरी जैसे अपराध भी शामिल हैं। वहीं पूरे तमिल की बात करें तो सेंचुरी में कुल 102 विश्वविद्यालयों को अंजाम दिया गया है। जिसमें थूथुकुडी के 16 हत्यात्सव भी शामिल हैं। वहीं पूरे देश की बात करें तो करीब 17 हजार से ज्यादा जघन्य अराधों में नाबालिगों का हाथ है।
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पहले प्रकाशित : 7 दिसंबर, 2023, 08:47 IST
