उत्तर
जब डायबिटीज में यूरिन से तैयार किया जाता है तो इसे डिस्पस्टिक यूरिन टेस्ट कहा जाता है।
ब्लड सैंपल से मिश्रण क्रिएटिनिन का पता चलता है।
किडनी फंक्शन टेस्ट चार्ट: किडनी हमारे शरीर का अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है। इसे बॉडी की पावरफुल केमिकल का नाम भी कहा जाता है। किडनी बॉडी से केमिकल वेस्ट मैटेरियल को बाहर किया जाता है। इसके साथ ही यह शरीर में फ्लूड की रचना है। ऑर्थोग्राफ़िक हार्मोन भी रिलीज़ होता है जिससे ब्लड डिपार्टमेंट रेगुलेट रहता है। इसके अलावा विटामिन डी को सक्रिय करता है जिससे हड्डियां मजबूत होती हैं। वहीं आरबीसी उत्पादों को भी किडनी नियंत्रण किया जाता है। किडनी के महत्व को देखते हुए इसकी व्याख्या को समझा जा सकता है। हमारे जीवन के लिए कैंसर का दस्तावेजीकरण बहुत जरूरी है। आजकल लोग जंक फूड, फास्ट फूड, चिप्स आदि का सेवन ज्यादातर करने लगते हैं, इस कारण से किडनी पर अतिरिक्त प्रभाव पड़ता है। सिद्धांत के अनुसार सभी कारणों से 30 साल बाद हर इंसान को एक साल में एक बार नोबेल फाइनेंसियल इन टेस्ट जरूर करना चाहिए।
क्या-क्या किडनी हड्डी परीक्षण
किडनी फंतासी टेस्ट से यह पता चलता है कि किडनी अपना प्राकृतिक काम कर रही है या नहीं। अगर नहीं कर रही हैं तो इसमें किस तरह की परेशानियां हैं. अगर पेशाब करने में परेशानी हो, दर्द हो या खून आए तो डॉक्टर मूत्रवर्धक परीक्षण की सलाह देते हैं। किडनी फैसिलिटी टेस्ट के कई तरीके हैं। इसमें आइसोलिन से भी पोटैशियम और ब्लड से भी लिया जा सकता है।
यूरिन टेस्ट-अमेरिकन सेंटर फॉर कंट्रोल एंड प्रिवेंशन की रिपोर्ट में कहा गया है कि जब भी मूत्र में पेशाब की मात्रा ली जाती है तो इसे डिपस्टिक यूरिन टेस्ट कहा जाता है। इसमें पेशाब का केमिकल का विश्लेषण किया जाता है। इससे पता चलता है कि यूरोपियन प्रोटीन अच्छा है या नहीं। इससे एल्ब्यूमिन प्रोटीन का पता चलता है। इसी से एकक्रांत की गणना की जाती है। एक प्रोसेसर का नाममात्र रेंज 30 से कम होना चाहिए। यूरिन से ही क्रिएटिनिन क्लीयरेंस का परीक्षण किया जाता है। इससे पता चलता है कि आपके जैतून के सुपरमार्केट को फायदा हो सकता है। इसके साथ ही पेशाब में ब्लड, पीएस, शुगर, शुगर आदि का पता लगाया जाता है।
रक्त परीक्षण-ब्लड सैंपल से मिश्रण क्रिएटिनिन का पता चलता है। स्केल क्रिएटिनिन इनरुनी टूट-फूट से बनी अपशिष्ट पदार्थों से बनी है। यूरिन में मौजूद एल्ब्यूमिन की मात्रा को यूरिन में मौजूद क्रिएटिनिन की मात्रा से विभाजित करके एसीआर मान की गणना की जाती है। इसके साथ ही ग्लोमेरूलर फ़िल्ट रेश्योना GFR आउट ऑफ़ आउट होता है। यह 90 से ऊपर होना चाहिए. यह पता चलता है कि किडनी का कार्य सही प्रकार से होता है। ब्लड क्लोराइड से सोडियम, पोटेशियम, क्लोराइड, फास्फोरस, कैल्शियम, ग्लूकोज, ब्लड क्लोराइड, क्रिएटिनिन आदि की जांच की जाती है।
- KFT का नामकरण रेंज
- परीक्षण ————————————————- सामान्य रेंज
- 135-145 mEq/L
- पोटैशियम ———————————————3.0-5.0 mEq/L
- कॉलोनी———————————————- 90-107 mEq/L
- बाइकार्बोनेट ———————————————20-29 mEq/L
- फास्फोरस—————————————————2.5-4.5 मिलीग्राम/डीएल
- कैल्शियम ————————————————-8.5-10.2 मिलीग्राम/डीएल
- ग्लूकोज —————————————————70.100 mg/dL फास्टिंग में
- ब्लड ग्लूकोज़ डाइजेस्ट——————————— 7-20 mg/dL
- केटेनाइन ——————————————– 06-1.2 मिलीग्राम/डीएल
- एलब्यूमिन ———————————————- 3.4-5.0 मिलीग्राम/डीएल
- ईज़ीफ़ार—————————————- 60 से अधिक
- रक्त शर्करा डाइजेस्ट——————————– 6.22
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पहले प्रकाशित : 7 दिसंबर, 2023, 16:37 IST
