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ठंड में 31 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हार्ट अटैक का खतरा! जानें समुद्र तट के मौसम में कैसे करें आरक्षण


रोहित भट्ट/बच्चा. यहां की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अपने शरीर पर ध्यान नहीं दे पाते हैं। जिस वजह से वो कई तलबा की चोटी पर आ जाते हैं। शिशु डिफ़ेक्शन के लिए हमें अपनी असाधारण स्वास्थ्य सामग्री, योग, व्यायाम आदि को शामिल करना चाहिए। वहीं ठंड के मौसम में भी गिरावट दर्ज की गई है। ओरिएंटल में दिल के मरीज़ पर विशेष ध्यान देने की ज़रूरत है। असल में ठंड में हार्ट अटैक के मामले बढ़ रहे हैं। एक शोध रिपोर्ट के अनुसार, इसमें पहले से हृदय संबंधी विकार शामिल हैं। प्रमुख रूप से उनमें हार्ट अटैक का खतरा 31 प्रतिशत तक बढ़ गया है। ऐसे में दिल के मरीज से जुड़ी कुछ खास बातें, इस रिपोर्ट में जानते हैं.

उत्तराखंड में स्थित लाइफ केयर हॉस्पिटल एंड कार्डिएक केयर सेंटर के डॉ. लक्ष्मण लाल सुथार ने ‘लोकल 18’ से बातचीत में कहा कि ठंड के मौसम में हृदय सागर पर सबसे ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। ठंड के मौसम में लोग अपने शरीर पर ध्यान नहीं दे पाते हैं, खासकर हृदय रोगी। ठंड के मौसम में लोग कम पानी पीते हैं, जबकि आपको शरीर की जरूरत के अनुसार पर्याप्त पानी की जरूरत होती है। इसकी मात्रा बहुत ज्यादा भी नहीं होनी चाहिए. दिल के दिल को ठंड के मौसम में सुबह की सैर पर नहीं जाना चाहिए। इस मौसम में अधिकतर खाना न तो स्थिर है. व्यवसाय और व्यवसायिक व्यवसायिक व्यवसाय।

ठंड के मौसम में नियमित व्यायाम आवश्यक हैं
डॉ. लक्ष्मण लाल सुथार ने कहा कि ठंड के मौसम में शरीर में विटामिन डी की कमी भी नहीं होनी चाहिए। इसके लिए आप डॉक्टर से सलाह लेकर विटामिन डी की टैबलेट ले सकते हैं। आपको नियमित व्यायाम या योग करना चाहिए, जिससे आपका शरीर हमेशा फिट रहेगा और आप स्वस्थ रहेंगे। डॉ. लक्ष्मण ने कहा कि पहाड़ के लोग अपने शरीर के बारे में कोई सुझाव नहीं देते। साल में एक बार उन्हें अपना रूटीन चेकअप जरूर कराना चाहिए।

कोरोना के बाद बढ़ा हार्ट अटैक का खतरा
विश्वास है कि वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, कोरोना वायरस से ठीक हो चुके लोगों के दिल पर गहरा असर पड़ता है। संक्रमण के इलाज के बाद सांस लेने में तकलीफ और सीने में दर्द जैसे लक्षण दिख रहे हैं। दिल के काम करने की क्षमता पर बुरा असर पड़ रहा है, जो लंबे समय तक दिख रहा है। यही कारण है कि कोरोना काल के बाद हार्ट अटैक के मामले काफी बढ़ गए हैं। वहीं कम उम्र के लोगों को भी दिल का दौरा पड़ता है।

टैग: अल्मोडा समाचार, स्वास्थ्य समाचार, जीवन18, स्थानीय18, उत्तराखंड समाचार



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