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सफलता की कहानी: पिता के निधन के बाद छोड़ी नौकरी, अब मछलीपालन से कमा रहे 10 लाख, कई लोगों को मिला रोज़गार


मो.महमूद आलम/नालंदा. दिल में कुछ करने का जुनून हो और हार न हो तो इंसान जरूर सफल होता है। बिहार के क्रिकेटरों के अंकित कुमार ऐसे ही एक स्पेशलिस्ट हैं. मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स यानी मस्टिया की नौकरी छोड़ कर उन्होंने कुछ अपना करने का सोचा। मछुआरे ने मछली पालन करना शुरू किया। आज उनकी कमाई 10 लाख रुपये है. साथ ही उन्होंने 8 लोगों को रोजगार भी दिया है. मूर्ति के आस्था खंड के अंतर्गत तायमचक गांव के निवासी मुकेश कुमार ने बताया कि उनके पिता स्वर्गीय लक्ष्मी प्रसाद किसान थे। वो दो भाई हैं जिनमें वो बड़े हैं।

न्यूज़ 18 लोकल से बात करते हुए बताया गया कि मोइक ने बताया कि बुजुर्ग पिता का सहारा बनने के लिए ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव की नौकरी की। इससे उनके घर की आर्थिक स्थिति में सुधार तो आया, लेकिन अचानक उनके पिता का साया उठ गया। इसके बाद छोटे भाई की पढ़ाई के साथ परिवार चलाना मुश्किल था, लेकिन उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ा। नौकरी के बढ़ते ड्रग की वजह से दीपक ने अपने दोस्तों से बिजनेस शुरू करने के टिप्स लिए। इसके बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी और वर्ष 2015 में अपने थ्री पीस 20 लाख रुपये की लागत से मछली पालन शुरू किया।

यह काम शुरू करने के बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा गया। आज मछली पालन से सर्वे पर 10 लाख रुपये की कमाई हो रही है। इंस्पेक्टर ने बताया कि उन्होंने एल्डर मेडिसिनल लिमिटेड कंपनी में 15 साल तक नौकरी की थी।

जिले के दूसरे सबसे पुराने मत्स्यपालक हैं

उद्यमियों के मोहनपुर मत्स्य व्यवसाय के बाद अंकित कुमार जिले के दूसरे सबसे पुराने मत्स्य व्यवसाय व्यवसाय हैं। उनके मछली पालने वाले किसानों के मछली पकड़ने के स्थान बिहार के अलावा कई जिलों के मत्स्यपालक किसानों के मछली पकड़ने के स्थान पर उपलब्ध हैं। इसके अलावा, उनका मछलीघर झारखंड व बंगाल में भी स्नातक है। हर साल फिश के स्पॉन की तैयारी ओर कैरेबियन को करने पर उनका खर्चा दो से बढ़कर एक लाख करोड़ पचास लाख होता है।

विकी रेहू, कटला, सिल्वर, ग्लास्कर, कॉमन कार्प और नैनी इग्लैण्ड के जीवों का स्पॉन और मछली पकड़ने का भंडार हैं। इनमें से यहां रोजगार हासिल करने वाले सभी आठ लोग पश्चिम बंगाल में रहने वाले हैं।

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