गौहर/दिल्ली: स्वाद के शौक़ीन हर गली-मुहल्लों को सस्ते दाम मिलते हैं। अगर आप भी किशोरों में से एक हैं तो इस नायब चीज को दोबारा पाने के लिए आप भी बेवकूफ चौक की सड़कों पर निकल पड़ेंगे। इसका नाम एस्टीमेट की चैट है, जिसे किमचंद और फैमिली ने 100 साल से बंद कर दिया है। खेमचंद के बेटे ऑर्डर ने बताया कि उनके दादाजी ने ही पुरानी दिल्ली में व्यवसाय की शुरुआत की थी।
खेमचंद के बेटे ने बताया कि इसे बनाने के लिए रात में खुले आकाश के नीचे एक बड़ी ताज़ी में दूध को मथा जाता है। दूध को इतनी देर तक मथा जाता है कि इसमें से ज़ग पाया जाता है। इसी झाग से नमक की चाट बनाई जाती है. दूध के मथने से जो झाग नारियल है, उसे एक खस्ता तालाब में रात भर खुले आसमान के नीचे रखा जाता है। ताकि ओएस की छुट्टियों से दूध के ऊपर एक क्रीम की परत बन सके। फिर उसी क्रीम को बाद में इकट्ठा करके उसमें कुछ सी चीनी भी मिला दी जाती है।
चाट बनाने की रेसिपी
इसके बाद क्रीम, दूध, केसर और मेवा को कई बार फेंटा किया जाता है। ध्यान रहे कि यह सिर्फ सर्द रातों में ही बनता है। यानि दिसंबर और जनवरी के आसपास। इन साड़ी मसाला को रात भर इस पॉट को छत पर या बाहर ही छोड़ दिया जाता है। दिलचस्प बात यह है कि यह डिजर्ट या मिठाई बहुत कम समय के लिए उपलब्ध है। इसलिए एक चाट की कटोरी की कीमत 100 रुपए है।
कहाँ स्थित यह चैट
असली एस्टाल्ट की चैट सिर्फ अज्ञात चौक में है। अगर आपने भी इसे मजा लिया है तो आपको येलो मेट्रो लाइन से कम्फर्ट चौक मेट्रो स्टेशन पर उतरना होगा। नंबर 2 से बाहर की तरफ दिखने वाली कुछ ही दूरी पर स्थित गली में आपको यह स्टॉल की चाट मिल जाएगी। यह नमक की चाट की दुकान आपको सातों दिन पर मिलेगी मिलेगी। सुबह 9:00 बजे से लेकर रात के 9:00 बजे तक.
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पहले प्रकाशित : 9 दिसंबर, 2023, 16:34 IST
