ऐपल/. ‘असकली’ हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड का एक खास पहाड़ी व्यंजन है। इसे एस्कॉल में बनाया जाता है. इस पहाड़ी व्यंजन को खास उत्सवों में भी शामिल किया जाता है। असकली प्राचीन समुद्र तट में हिमाचल के दुर्गम द्वीप जैसे गिरिपार में बनाया जाता है, जब भी कोई खुशी का मौका आता है, तब इसे जरूर बनाया जाता है। इसे पहाड़ी ही नहीं पूरे देश के लोग खाना पसंद करते हैं. ये देखने में तो इडली जैसी लगती है, लेकिन स्वाद अलग और बनाने का तरीका भी अलग होता है.
असकली को चूल्हे पर आग पर प्लास्टर मिट्टी से बने ढाँचों से ढक कर बनाया जाता है। मुख्य रूप से तीन की बनी हुई चीजें हैं, मिठाई जो गुड़ के प्रकार और टुकड़ों से बनी हैं, अलग-अलग तरह की होती हैं, तीसरी नकली होती हैं। मिठाई को घी के साथ, दही को घी के साथ, दही को घी के साथ, जबकि फीकी को मैश, चीनी को घी के साथ खाया जाता है. परंपरा के अनुसार, पत्थर के बर्तन भी बनाये जाते हैं, लेकिन आज के दौर में गैस भी बनायी जाती है।
असकली है शुभ संकेत
त्यौहारों पर सालों से असकली बनाने की परंपरा चली आ रही है, जिस घर में ये पर कुछ नहीं दिखता उस घर में कुछ ना कुछ अशुभ माना जाता है। इस परंपरा को संजोए रखा जाता है और शुभ के लिए असकली बनाई जाती है। आटे के लिए बहुत सारे मसाले बनाये जाते हैं और उसके बाद आटे के मसाले से असकली बनाये जाते हैं। ये लक्ज़री पर बनाया गया है.
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पहले प्रकाशित : 9 दिसंबर, 2023, 13:56 IST
