Homeमनोरंजनकमाल का होता है काले गाजर के घंटे का हलवा, 4 में...

कमाल का होता है काले गाजर के घंटे का हलवा, 4 में होता है तैयार, स्वाद के साथ सेहत के लिए भी बेस्ट, जानें रेसिपी


अंजलि सिंह राजपूत/लखनऊ:अवध के बादशाह और सबसे लोकप्रिय नवाब वाजिद अली शाह का पसंदीदा काले गाजर का हलवा आज भी नवाबों के शहर नोएडा में बनता है। जिसे बनाने की शुरुआत नवाब वाजिद अली शाह ने अपने वक्त में की थी। कहते हैं काले गाजर के हलवे से ही नवाब वाजिद अली अपने मेहमानों के मेहमान नवाज़ी करते थे। आपको पता है कि यह हलवा कैसे बनता है। अगर नहीं तो आपको बता दें कि नवाबों के शहर में स्थित अकबरी गेट एक बेहद पुरानी दुकान है। जिसे अमेरीकी मिठाईयां कहते हैं। जानें इसकी पूरी प्रक्रिया क्या होती है.

सबसे पहले काले गाजर का सेवन किया जाता है। इसे साफ पानी में तीन से चार बार साफ किया जाता है। इसके बाद इसे घीसा जाता है. घिसने के बाद इसे खौलाते हुए दूध में उबाला जाता है। लगभग 4 घंटे तक यह बढ़िया से प्याज़ चला गया। मसाले के बाद इसमें मसाले और मसाले डाले जाते हैं और फिर इसे कुछ देर तक मसाले के लिए छोड़ दिया जाता है।

डॉक्युमेंट्स के नमूने हैं स्वाद

काली गाजर के हलवे में पिस्ता, काजू और बादाम और इलायची के टुकड़े मिक्सी में लिये जाते हैं. फिर इस पाउडर को इस हलवे में मिला दिया जाता है. यही नहीं कम से कम आधा किलो में घी की कल्पना होती है। फिर पूरे हलवे को अच्छे से मिक्स किया गया।

हलवा प्रयोग किया जाता है

इसके बाद हलवे को एक बड़ी सी प्लेट में शान से उसके ऊपर देसी घी में प्रतिष्ठित काजू को रखा गया है और पिस्ता को उसके ऊपर से प्लास्टर के रूप में स्थापित किया जाता है। यहां से इसे दुकान पर भेजा जाता है.

2 घंटे में बिकता है 20 किलो हलवा

मौलाना स्वीट्स के मालिक शेखावत ने बताया कि रोज 20 बच्चों का हलवा यहीं बनता है। इसकी कीमत 480 रुपये किलो है और 100 ग्राम 48 रुपये किलो है। पूरे 20 किलो हलवा रोज 2 घंटे में बिकता है। इन दिनों में भी इनकी खूब मांग है। लोग अब लाल गाजर के हलवे की जगह काले गाजर के हलवे की डिमांड सबसे ज्यादा कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि उनकी दुकान अकबरी गेट के पास ही स्थित है, जिसकी वजह से वह पूरे पुराने शहर में मौजूद है। उन्होंने बताया कि यह हलवा सिर्फ लखनऊ में ही बनता है। इसकी शुरुआत तो नोएडा से ही हुई है, लेकिन अब तो यह इलाहाबाद में भी बन गया है। उन्होंने बताया कि काली गाजर उनके पास स्ट्रॉबेरी और सिलिकॉन मौजूद हैं।

ऐसा है इसका स्वाद

काले गाजर के हलवे का स्वाद लाल गाजर के हलवे से बिल्कुल अलग होता है। यह मुँह में ही जाता है. इसे बहुत बड़े पैमाने पर बंद नहीं किया गया है। यह हलवा आपको स्वाद के साथ ही सेहत भी देता है क्योंकि काला गाजर शरीर में खून बढ़ाने में बेहद अहम माना जाता है।

टैग: खाना, भोजन 18, हिंदी समाचार, स्थानीय18, यूपी खबर



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Must Read

spot_img