नई दिल्ली. कांग्रेस के डेमोक्रेट और डेमोक्रेट शेयरहोल्डर के शेयर पर आयकर विभाग की कार्रवाई में अब तक 351 करोड़ रुपये की वसूली हो चुकी है। यह क्रिया भी एक रिकार्ड बन गई है। किसी भी एजेंसी द्वारा एक ही ऑपरेशन में अब तक की सबसे बड़ी बरामदगी की गई है. बता दें कि साहूकार ग्रुप पर टैक्स चोरी का आरोप है। इस पर एक्शन लेते हुए आयकर विभाग ने छह दशकों की उपलब्धि की थी।
इस दावे का एक बड़ा हिस्सा साहूकार से जुड़े ओडिशा स्थित बाउध डिस्टिलरी प्राइवेट लिमिटेड से बरामद किया गया था। टैक्स चोरी और “ऑफ़-द-बुक” के आरोप में डिसिलरी के प्रमोटरों और अन्य के खिलाफ़ 6 दिसंबर को डेमोक्रेसी की शुरुआत हुई थी। खोज के दौरान 100 से अधिक लोग मौजूद थे और ज़ब्ती हमले की गिनती के लिए 40 से अधिक अवशेष मिले थे।

ज़ब्त करने की प्रक्रिया क्या है?
इन्वेस्टमेंट के दौरान इन्वेस्टमेंट स्टॉक इन्वेस्टमेंट्स ने बिजनेस, सुपरमार्केट और आर्किटेक्चर के तहत सभी इन्वेस्टमेंट्स, फाइनेंशियल डॉक्यूमेंट्स, प्रॉपर्टी के स्टोर्स, इलेक्ट्रॉनिक सामान, सोना और अन्य आर्किटेक्चर की जांच की है। दो स्वतंत्र गवाहों की राय को जब्त कर लिया जाता है, फिर सील कर दिया जाता है। फिर इसे एक राष्ट्रीय बैंक में ले जाया जाता है। मुद्रा कर विभाग द्वारा खाते में जमा की गई धनराशि जब्त कर ली गई है। इस मामले में, ओडिशा के भारतीय स्टेट बैंक के आईटी विभाग में 351 करोड़ रुपये जमा हो गए, जिसमें प्रोविजन बैंक (पीडी) खाता भी शामिल है।
इसके बाद क्या होगा?
ऐसे किसी भी मामले की जांच आयकर विभाग की जांच इकाई द्वारा की जाती है। यह इकाई सभी अभिलेखों और अभिलेखों की पुस्तक का अध्ययन करती है और 60 दिनों में एक आकलन रिपोर्ट तैयार करती है। एक बार आकलन आदेश तैयार हो जाने के बाद, मामले के पिछले दिनों और खतरों को अपने आय का स्रोत वस्तुओं का अवसर दिया जाता है। इस प्रक्रिया में 18 महीने लगे, इस दौरान एजेंसी जांच के दौरान दिए गए साक्ष्यों और संदेहों पर ध्यान दिया गया। इसके बाद ऐसा होता है कि ज़ब्ती की गई आपत्ति से बहुत अधिक अवैध है।
तो मिल सकता है पैसा अगर…
बेहिसाबी डिक्शन पर 30% कर के रूप में और अवैध डिक्शन पर 60% के रूप में अज्ञात है। इस प्रक्रिया के दौरान, साज़िशों को कुल ज़ब्त किये गये धन पर ब्याज भी देना होगा। एक बार पूरी प्रक्रिया समाप्त हो जाने के बाद, यदि संदेह को राशि में से कुछ पैसे मिलने की संभावना है, तो आईटी विभाग राशि से ड्राफ्ट ड्राफ्ट को वापस कर देता है। यदि आईटी विभाग पर अभी भी कुछ पैसा है, तो भुगतान करने के लिए संशय को नोटिस भेजा जाता है।
शैल के सहायक की भूमिका भी जांच के कार्यालय में
सिद्धांत के अनुसार, ”अवैध” तरीके से नियोजित धन के इस्तेमाल को लेकर निवेशक और ‘मुखौता (शेल) आयोग’ की भूमिका की जांच के सिद्धांत में है। आयकर विभाग की क्षेत्रीय जांच शाखा द्वारा एक अंतरिम रिपोर्ट विभाग की कार्रवाई पर कार्रवाई, दिल्ली में सेंट्रल डायरेक्ट कर बोर्ड (सीबीडीटी) को भी भेजी गई है। इंदौर ने बताया कि ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल में 30-34 क्षेत्रों की पाइपलाइन ली गई है। उन्होंने बताया कि विभाग ने करीब तीन किलोमीटर दूर सोने के आभूषण भी जब्त कर लिए। दस्तावेज ने बताया कि इन तीन राज्यों में काम करने वाले कई दस्तावेज और कुछ दस्तावेज या संदिग्ध दस्तावेज विभाग की जांच के दस्तावेजों में शामिल हैं, क्योंकि इन तीन राज्यों में काम करने वाले और भारी पैमाने पर दस्तावेज की बरामदगी के दौरान उनकी भूमिका का संकेत वाले दस्तावेज बरामद किए गए हैं।
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पहले प्रकाशित : 12 दिसंबर, 2023, 21:39 IST
