
इमरान ख़ान, पूर्वी अफ़्रीका, पाकिस्तान।
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अब एक नए केस में इमरान खान पर पाकिस्तान की अदालत ने आरोप तय कर दिया है। इससे अब जेल में बंदला-रहते पर ही एक और नया मुकदमा शुरू हो गया है। इमरान खान पर इस बार जिस मामले में आरोप लगा है, उसे ‘सिफर’ मामले में कथित तौर पर पेश किया जा रहा है। अगर इस केस में वह अभिषेक सिद्ध कर देते हैं तो उनकी पूरी राजनीति “शून्य” पद पर आ सकती है। आइए आपको बताते हैं कि ये ‘सिफ़र’ मामला क्या है, जो इमरान के गले का नया प्रशंसक बन गया है।
पाकिस्तान की विशेष अदालत ने विश्वास दस्तावेज लीक करने और देश के कानून का उल्लंघन करने के मामले में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनके सहयोगी व पूर्व विदेश मंत्री शाह महमूद महमूद को बुधवार को अभयरोपित कर दिया है। इसे ‘सिफर’ केस के तौर पर जाना जाता है। न्यायाधीश अबुल हसनत जुल्कारन ने रावलपिंडी की अदियाला जेल में केस की सुनवाई की, जहां दोनों नेताओं को बंद कर दिया गया है। जज ने दोनों नेताओं की साझीदारी में उनके दावों को खारिज कर दिया, लेकिन दोनों ने खुद को बेगुनाह बताया।
सिफर मामले में दूसरी बार तय हुआ इमरान पर आरोप
यह दूसरी बार है जब उन पर आरोप तय किए गए हैं। इससे पहले, उन्हें 23 अक्टूबर को अभ्यारोपित किया गया था, लेकिन इस प्रक्रिया को इस्लामाबाद उच्च न्यायालय ने रद्द कर दिया था। जज जुल्करनैन ने चार दिसंबर को मामले की सुनवाई करते हुए घोषणा की थी कि इस्लामाबाद उच्च न्यायालय के जज के आलोक में ताजा अभियोग अनिवार्य है। उच्च न्यायालय ने प्रक्रियागत आधार पर जेल में सुनवाई के फैसले के खिलाफ सुनवाई करते हुए सभी मुकदमों को अवैध करार दिया था। संघीय जांच एजेंसी ने देश के आपराधिक ढांचे के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए 15 अगस्त को सिफर मामला दर्ज किया था। (भाषा)
