रोहित भट्ट/बच्चा. उत्तराखंड की सांस्कृतिक नगरी असेंबली बाल, माल और पाताल के लिए विश्व में प्रसिद्ध है। यहां बाल से मतलब बाल मिठाई (बाल मिठाई अल्मोडा) से है, माल से मतलब यहां की खूबसूरत रोड से है और पाताल से मतलब है बिगुल बाजार में बिछी पाताल से है। बाल मिठाई की बात करें तो पूरी दुनिया को अपना दीवाना बना लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (पीएम नरेंद्र मोदी) को भी यह मिठाई बहुत पसंद है। क्या आपको पता है कि बाल मिठाई कैसी होती है, अगर नहीं पता तो हम आपको इस खबर में बताते हैं।
इस मिठाई को बनाने के लिए सबसे जरूरी है शुद्ध खोया या मावा। खोये को पेंटिंग में नोबेल इसे महान से स्थापत्य बनाता है। एक घंटे के बाद बंद करें चीनी या फिर बुरा कंपनी। फिर इस मिश्रण में चीनी चाशनी की चाशनी डाली जाती है और उसे संचालित किया जाता है। इसके बाद इसे ठंडा करने के लिए रख दिया जाता है. कुछ देर बाद जब यह मिश्रण ठंडा हो जाता है, तो इसमें चौकोर दृश्य शामिल हो जाता है। दाना के बाद बाल मिठाई तैयार हो जाती है.
लाला जोगा साहा ने सबसे पहले बनाई थी बाल मिठाई
बाल मिठाई के विक्रेता निखिल साहा ने बताया कि वर्ष 1865 में लाला जोगा साहा द्वारा इस बाल मिठाई को सबसे पहली बार बनाया गया था। जिसके बाद धीरे-धीरे धीरे-धीरे लोग यहां तक पहुंच गए और आज यह उत्तराखंड ही नहीं बल्कि देश-विदेश में लोगों की पसंद बन गई है। कभी-कभार लोगों को बाल बनाने की वजह से बनी मिठाई मिल भी रास नहीं आती। बाल मिठाई के मुरीद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी हैं. उनकी दुकान पर बाल मिठाई 380 रुपये किलो है। ग्राहक भुवन सिंह ने बताया कि वह 35 साल के लाला जोगा साहा के वहां से बाल मिठाई ले रहे हैं। इस मिठाई को सबसे पहले बनाया गया था। यहां की मिठाई का टेस्ट पहले जैसा था, वह आज भी जरूरी है।
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पहले प्रकाशित : 14 दिसंबर, 2023, 18:17 IST
