सच्चिदानंद/पटना. कभी अपनी बीमार पत्नी को अस्पताल ले जाने में दीक्षित को परेशानी हुई, तो उन्होंने पहाड़ का सीना चीरकर सड़क बना दी थी। वहीं, पटना के पुनपुन इलाके के अशोक सिंह भी दीपावली से कम नहीं हैं। सांस की तकलीफ बनाए रखने से परेशान पत्नी को स्वस्थ करने के लिए उन्होंने गांव की 4 किमी की सड़क के दोनों ओर सैकड़ों उपचार लगाए, जो अब पेड़ नहीं सिर्फ शुद्ध ऑक्सीजन दे रहे हैं, बल्कि गर्मी के दिनों में सांस लेने के साथ-साथ साज-सज्जा भी कर रहे हैं। कुछ पल ठहरने के लिए कुछ देर भी दे रहे हैं। अशोक सिंह न केवल औषधीय औषधियां हैं बल्कि उनकी देखभाल में हर दिन आठ घंटे का समय भी बिताते हैं। गांव में घुसते ही सड़क के दोनों ओर आपको पाकड़, पीपल, बरगद, कदम और जामिन के पेड़ दिखेंगे।
जवानी के दिनों में बंगाल में रहने के कारण अशोक सिंह का नाम बलिया बाबा पड़ गया। साल 2011 में पत्नी मनोरमा देवी को सांस की बीमारी हुई तो एक साधु ने इलाज की सलाह दी। फिर क्या था? अशोक सिंह ने अपनी साइकिल पर बाल्टी और खुरपी की दुकान लगाने के लिए निकल पड़े। पत्नी ही नहीं, गांव के हर सीमेंट को शुद्ध ऑक्सीजन मिल रही है, इसके लिए पूरे गांव में सड़क किनारे के उपाय दिए गए हैं। 12 साल से ये फ़िल्म रिलीज़ हुई है। अशोक न सिर्फ पेड़ पौधे ही नहीं बल्कि उसकी देखभाल भी करते हैं। सलाह दी गई कि हर पौधे में 30 से 35 विचार रखे गए हैं। गांव के लोगों ने भी इस सड़क का नाम बस्तर बाबा पथ रखा है। अब तो अकौना गांव की पहचान भी होती है बंगाली बाबा से।
खपरैल वाला घर, खेती से चलता है जीवन
अशोक सिंह नामांकित बाबा बाबा की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है। घर कुत्ता-फुटा खपरैल का है और जीवन यापन की खेती सेव है। इसके बावजूद पेड़ बनाने के इस काम को अशोक ने नहीं छोड़ा। अशोक सिंह ने कहा कि इन पेड़ों ने अपनी पत्नी को जीवनदान दिया है। मेरा पूरा जीवन भी इन पेड़ों को समर्पित है। जब तक सांसर्टम प्लांट प्लांट और केयरऑनलाइन। सोमनाथ, पटना के पुनपुन इलाके के अकौना गांव के लोग भी अशोक सिंह के इस काम से बेहद खुश रहते हैं। वे लोग पेड़ लगाने में भी मदद करते हैं। हालाँकि शुरुआत में कुछ लोग उन्हें पागल कहते थे, लेकिन आज वो भी बंगाली बाबा की स्तुति करते नहीं थकते हैं।
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पहले प्रकाशित : 15 दिसंबर, 2023, 12:27 IST
