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3 घंटे में बिक जाते हैं 500 प्याज के पकौड़े, 25 संतों से मिलता है स्वाद और देसीपन


रीते कुमार/चूँकि : ठंड का मौसम शुरू होते ही लोगों का ध्यान चटपटे व्यंजनों की ओर चला जाता है। इसमें भी गरमा-गरम तरह-तरह के पकौड़े खाने को मिल जाए तो क्या देखें. अक्सर लोग आलू, बैगन और गोभी के पकौड़े खाना पसंद करते हैं. लेकिन, ओब्जिया जिले केपुर कल्याण खंड के नीचे भट्टी चौक पर मीटिंग वाले का पकोड़ा बेहद लाजवाब होता है।

यहां प्याज के पकौड़े खाने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ती है। इसी चौक पर खोखरी राय पिछले 25 सालों से लोगों को प्याज का पकौड़ा खिला रहे हैं। यह प्याज का पकौड़ा खाने के लिए लोग आस-पास ही नहीं बल्कि 30 किमी दूर से जाते हैं। लोगों का मानना ​​है कि खोखरी राय के हाथ में जादू होता है और इनका पकोड़ा बेहद करारी होता है।

3 घंटे में बिक जाते हैं 500 पीस प्याज के पकौड़े
बता दें कि खोखरी राया कोई बड़ा रेस्तरां या कोई ढाबा नहीं है बल्कि एक चार पहिए वाले ठेला की रेड़ी है। जिस पर उनकी दुकान साजी रहती है और ये पिछले 25 साल से इसी जगह पर अपना ठेला जेल आ रहे हैं। पकौड़े का स्वाद लाजवाब रहने की वजह दूर-दराज के इलाके से भी लोग यहां खाने के लिए पढ़ते हैं। खास बात यह है कि खोखरी राय रेस्तरां ठेला लगाना नहीं है, बल्कि बात सिर्फ क्लासिक 3 घंटे की है।

भीड़ इतनी रहती है लोगों को क्रमबद्ध तरीके से इंतजार करना पड़ता है। प्याज का पकौड़ा टेस्टी के साथ-साथ होता है। लोगों को 10 रुपये में एक टुकड़ा पकौड़ा खिलाते हैं. खोहारी राय अन्य प्रकार के भी पकौड़े बनाते हैं, लेकिन सबसे ज्यादा सेल प्याज के पकौड़े की ही होती है. रोजाना 500 पीस प्याज के पकौड़े की सेल होती है.

ऐसे तैयार हैं प्याज के पकौड़े
विशेषज्ञ खोभारी राय ने बताया कि पिछले 25 सागरों से यहां थेला कॉनलाइन आ रहे हैं। एक छोटी सी दुकान पर साड़ी की व्यवस्था है। उन्होंने बताया कि प्याज का पकोड़ा बनाने के लिए सबसे पहले प्याज के छिलके उतारकर चॉप करें. इसके बाद मसाला तैयार किया जाता है। जिसमें का पेस्ट, लहसुन का पेस्ट, अदरक का पेस्ट, गरम मसाला, धनिया पाउडर, हल्दी पाउडर, काली मिर्च पाउडर, कस्तूरी मेथी समेत कई प्रकार के मसाले मसाला तैयार किया जाता है.

मसाला तैयार हो जाने के बाद इसमें चॉप प्याज मिक्स किया जाता है। इसके बाद चावल के आटे में पहले छाना आता है। आधा पाक जाने के बाद निकल कर चापा जाता है और फिर बेसन लगाकर उसे तेल में छना जाता है। इसके बाद वैश्वीकरण को बढ़ावा दिया जाता है।

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