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भारत-पाक युद्ध 1971: सेनापति ने पाक सेना को नाकों चने चने दिए, 125 जांबाजों ने दी शहादत, 133 का अभी भी है इंतजार


भारत-पाकिस्तान युद्ध 1971: भारत-पाकिस्तान युद्ध 1971 में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जांबाजों ने भारतीय सेना के कंधे से कंधा मिलाकर न केवल युद्ध लड़ा था, बल्कि देश के लिए सर्वोच्‍च समर्पण दिया था। भारत-पाक युद्ध 1971 और बांग्लादेश लिबरेटरी लिबरेशन के दौरान नेशनल डेमोक्रेटिक पार्टी के जांबाजों ने सभी मोर्चो पर दुशमन को धूल चटा दी थी।

उल्‍लेखनीय है कि 1971 के युद्ध में सेनापति ने राजस्‍थान, गुजरात, जम्‍मू-कश्‍मीर, पंजाब, पूर्वी बंगाल और एनईएफ के साथ पूर्वी और पश्चिमी सीमा के आतंकियों पर युद्ध लड़ा था। मित्रो के साथ मुलाकात के बाद भारतीय सेना की संज्ञेय शक्ति चौगुनी हो गई थी। सेना और सेनापति के इस गठजोड़ ने दुसामन को शिकास्ट देने में अहम भूमिका निभाई थी। इस युद्ध में गठबंधन के जांबाजों के कौशल युद्ध की तरफ से हर तरफ प्रशंसा हुई थी।

संप्रदाय के 125 मतदाताओं ने देश के लिए सर्वोच्‍च बलिदान दिया था
भारत-पाकिस्तान युद्ध 1971 में मिशन ने भारतीय सेना के साथ मिलकर हर मोर्चे पर दुशमन सेना का मुकाबला किया था। 13 दिन चले इस युद्ध में गठबंधन का हर जांबाज अपनी जान की बाजी लगाए युद्ध लड़ाई। इस युद्ध में गठबंधन के करीब 125 जांबाजों ने देश के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्‍च बलिदान दिया था। इस युद्ध में 392 जाँबाज गंभीर रूप से जाखमाँही हुए थे। वहीं, इस युद्ध में 133 युवा ऐसे भी थे, जो लापता हो गए और उनका आज तक कुछ पता नहीं चल पाया।

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