ईटीएच यादव/प्रयागराज: यदि किसी धार्मिक संस्थान को सम्मान के साथ भोजन करा दे, तो वह व्यक्ति उस धार्मिक अनुष्ठान के लिए किसी फ़रिश्ते या देवदूत से कम नहीं है। ऐसे ही एक भोजनालय के बारे में आज हम आपको सांकेतिक भाषा में बताते हैं। ये व्यंजन पांच रुपये में गरीब और धार्मिक लोगों के लिए पेट स्टाम्प भोजन कराती है। इस रसोई में प्रतिदिन सैकड़ों लोग भोजन करते हैं। असम की नैनी में अन्नपूर्णा भोजनालय का उद्घाटन हुआ, इसके पीछे पांच लोगों का दिमाग है।
अभिलाष केसरवानी ने कहा कि जब कोविड का विकराल दौर चल रहा था उस समय कुछ गरीब गरीब लोग ऐसे भी थे, जो दो रोटी का जुगाड़ तक नहीं कर सके थे। मन में आया कि हम लोग मिलकर एक भोजनालय क्यों ना खोलें, जहां पर लोगों को मुफ्त में खाना खिलाया जाता है। प्रांजल केसरवानी, रवि कुशवाहा और अनूप पांडे ने मिलकर भोजनालय के साथ मिलकर अपने-अपने काम में हिस्सा लिया।
5 रुपये में भरापेट खाना है
इनमें से कोई कढ़ी चावल ऑफर करता है तो कोई आर्टिस्ट को ऑफर करता है वो दोना पत्तल की जिम्मेदारी अभिलाष केसरवानी पर है। प्रांजल केसरवानी की सलाह है कि हम लोग फ्री में खाना खाते हैं, लेकिन ₹5 की जो राशि ली जाती है वह राशि के रूप में सहायता करती है। इसके अलावा पूरे फंड की व्यवस्था में हम लोग मिलते हैं। रवि कुशवाहा के अनुसार खाना पकाने तक की साड़ी व्यवस्था की जिम्मेदारी हमारी है।
हर किसी को स्वादिष्ट खाना मसाला मिलता है
प्रांजल केसरवानी बताते हैं कि पिछले तीन साल से सुबह 8:00 बजे से ही नैनी में कढ़ी चावल अन्नपूर्णा भोजनालय पर मिलना शुरू हो जाता है। अब तो सभी को समय भी आसमान छूता रहता है इसलिए जैसे ही 8 बजते हैं खाने वालों की लाइन लगनी शुरू हो जाती है। छात्र हैं कि हमारा मुख्य उद्देश्य है कि भूख मुक्त भारत। इसी तरह जब भी लोग किसी रेस्तरां होटल में खाना खाने जाते हैं तो उसके लिए काफी भारी कीमत चुकानी पड़ती है। इससे जो गरीब होते हैं वह खाने से भी शुरू हो जाते हैं। यह भोजनालय इन गरीब बेसहारा लोगों पर ध्यान केन्द्रित किया जाता है।
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पहले प्रकाशित : 17 दिसंबर, 2023, 08:07 IST
