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यहां लोकप्रिय बेकार समय महिलाएं गाती हैं लोक गीत, बालों के गुनगुने के पीछे भी है विशेष कहानी, जानें महत्वपूर्ण बातें


लक्षेश्वर यादव/जांजगीर चांपा. छत्तीसगढ़ अपनी विविध संस्कृति और परंपराओं के लिए जाना जाता है। धमतरी किसान जिला महानिवासी है। यहां अधिकतर लोग कृषि कार्य करते हैं और जिलों में बड़े पैमाने पर धान की फसल का उत्पादन होता है। आजकल यहां धान काटने का काम तेजी से चल रहा है और इसके साथ ही यहां छत्तीसगढ़ी लोककला और संस्कृति भी दिखाई दे रही है। जिले के वनस्थली क्षेत्र में आज भी किसान एक दूसरे के धान कटाई के लिए सहायता करते हैं। जिससे दुकानदारों का पैसा नहीं होता और इससे किसानों की भी बचत होती है।

इसके अलावा यहां पर लोग आज भी ददरिया, कर्मा, सुआ गीत समेत अन्य लोकगीतों का गाना गाते हैं। इस बारे में किसानों ने बताया कि काम करने के लिए मनोरंजक तरीके से काम करने के लिए इस गाने को समय देना होता है जिससे काम की थकान भी मिट जाती है। संभवतः यही उचित है कि आज भी यह पारंपरिक ग्रामीण क्षेत्र में जारी है। आज भी अनलॉक में काम करते समय यह गीत सुना जा सकता है।

ज़ुमर बनाने की परंपरा
इसके साथ ही धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में धान से जुमर बनाने की परंपरा है। यहां धान की बालियों को गूंथकर घर के मुख्य दरवाजे पर गहनों का चलन है। किसान ने बताया कि ऐसा इसलिए करते हैं, क्योंकि फसल के समय में सभी को अधिकार और (धन) लक्ष्मी के आगमन के लिए यह जुमर स्वागत स्वरूप मिलता है। यह जुमर नई फाल से बने जुमर को घर के मुख्य द्वार पर फाँगया जाता है। ऐसा माना जाता है कि खेत में उगने वाले अनाज पर सबका अधिकार है। ये जूमर बनाने की परंपरा बहुत पहले से चली आ रही है, जो आज भी सहयोगी है।

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