मोहन प्रकाश/सुपौल। जिले में धीरे-धीरे ठंड अपने चरम की ओर बढ़ती जा रही है। ऐसे मौसम में बच्चों को सबसे ज्यादा सर्दी-बुखार और कोल्ड डायरिया का खतरा बना रहता है। यही कारण है कि बच्चों की बीमारियाँ सभी को सताने लगती हैं। इसे लेकर सदर अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. विनय कुमार कहते हैं कि जब-जब मौसम में तेजी से बदलाव होता है तब-तब वायरल इंफेक्शन बढ़ता है। ऐसे में बच्चों की सेहत का खास ध्यान रखना चाहिए। 5 से 13 साल के बच्चों को 9 से 11 घंटे की नींद लेनी चाहिए। अगर पूरी नींद है तो उनकी इम्युनिटी भी मजबूत होगी।
बच्चों के साथ माँ भी रखें अपनी सेहत का नुकसान
डॉ. विनय कुमार का कहना है कि बच्चों को रजाई या गर्म जगह से अचानक बाहर या ठंडी जगह पर ले जाने से बचना चाहिए। बच्चों के कान, हाथ, पैर सहित शरीर को पूरी तरह से गर्म कपड़े से सुखाकर रखना चाहिए। बच्चों की तेल मालिश जरूर कराएं, ताकि उनके शरीर का रोमछिद्र खुल जाए।
गरमा गरम और ताज़ा खाने के साथ चमत्कारी फल खिलाएं. वे कहते हैं कि बच्चे की मां को भी अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि अगर माँ बीमार होगी तो बच्चों की सेहत पर भी बुरा असर पड़ेगा। वे छात्रों को संक्रमण से लड़ने के लिए पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। ऐसे में 5 साल से बड़े बच्चों को स्वस्थ रहने के लिए नियमित रूप से सब्जी और फल खाना चाहिए।
सर्द हवा के कारण पारा 11 डिग्री से लेकर ठंडी रात तक
एक पखवाड़े में तापमान में 10 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आई है। साथ ही तेज पछुआ हवा भी चल रही है। इस कारण शाम ढलते ही कनकनी बढ़ती दिख रही है। जिलों में एक पखवाड़ा के दौरान अधिकतम तापमान अधिकतम 32 डिग्री से गिरकर 22 डिग्री और न्यूनतम 23 डिग्री से सेल्सियस तक 11 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया है।
इन उदाहरणों से सबसे अधिक संकटग्रस्त बच्चे, बुज़ुर्ग, दिहाड़ी मजदूर और कामकाजी लोग टुकड़े हो रहे हैं। तापमान में तेजी से हो रही गिरावट के अलावा दिन और रात के तापमान में भारी अंतर से लोग बीमार पड़ रहे हैं। इस कारण से ठंड-खांसी, कोल्ड डायरिया, बुखार के रोगी बढ़ रहे हैं।
.
टैग: बिहार के समाचार, स्वास्थ्य समाचार, स्थानीय18, सुपौल न्यूज़
पहले प्रकाशित : 17 दिसंबर, 2023, 18:13 IST
