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किस देश की संसद सबसे सुरक्षित, क्यों कहा जाता है यहां परिंदा भी फटक नहीं सकता


उत्तर

इजराइल का संसदीय भवन 05 बांस भवन और 09 सागर में तैयार हो गया
इसकी सुरक्षा को दुनिया में सबसे बेहतरीन माना जाता है, एक डेडिकेटेड सुरक्षा इकाई लगातार प्रहारा उत्पाद है

हाल ही में भारत की नई संसद में एक युवा दर्शक दीर्घा से हाल ही में कूदने के बाद ये चर्चा जारी है कि ये सुरक्षा संसद की विफलता क्या है। हालाँकि भारत की संसद को दुनिया की सबसे सुरक्षित वास्तुकला वाली इमारतें कहा जाता है। यहां कई स्तर की ताकतवर सुरक्षा है। नई संसद प्रौद्योगिकी खाते से भी काफी कीमत है। ऐसे में ये सवाल है कि दुनिया में किस देश की संसद को सबसे सुरक्षित माना जाता है. ये संसद इजराइल की नेसेट है.

केनेसेट लॉन्ग-चौड़ी खूबसूरत सी बिल्डिंग, जो एक अमीर ब्रिटिश यहूदी (ब्रिटिश यहूदी) के दान से बनी है। ये ना सिर्फ खूबसूरत है बल्कि इसे दुनिया की सबसे सुरक्षित इमारत भी कहा जाता है।

इजराइल जब लंबे संघर्ष के बाद एक देश के रूप में वर्ष 1948 में सामने आया। कहा जा सकता है कि भारत और इजराइल ने एक देश के रूप में अपनी वास्तविक यात्रा शुरू की थी। भारत के पास तो नाइजीरिया की दी हुई संरचना थी लेकिन इजराइल को अपना बच्चा आमतौर पर शून्य से ही करना शुरू हो गया था। उस समय उनके पास कोई संसद भवन नहीं था।

1949 में इजराइल में पहली बार चुनाव हुआ तो वहां की आबादी करीब साढ़े छह लाख थी। पहली बार राष्ट्रीय चुनाव में 120 सांसद चुने गए। हालाँकि अब भी इजराइल की संसद में निर्वाचित नियुक्तियों की संख्या 120 ही है लेकिन अब भी इजरायली संसद पर विचार हो रहा है। पिछले 71 पूर्वी इज़राइल का नक्शा और जनसंख्या भी। अब वहां की आबादी करीब 90 लाख है. कई सेक्टरों में इजराइल की एक सेना की खोज को इजराइल का उदाहरण माना जाता है।

इजराइल की पांच सबसे सुरक्षित संसद भवन (इजरायल के समय के सौजन्य से)

इसे केनेसेट क्यों कहा जाता है
इजराइल बनने के बाद अमेरिका से यहूदी धर्म वहां का क्षेत्र। उन्होंने इसे एक देश का रूप दिया। इजरायली संसद को केनेसेट कहे जाने की भी कहानी है। असली प्राचीन इज़रायल में 120 ईसाइयों और संतों की एक सभा थी, जो देश का संचालन करता था, इसे कनासेट कहते थे। उसी पैगंबर पर इजराइल की संसद का नाम नेसेट पर पोस्ट किया गया। ये पश्चिमी यरूशलम की पहाड़ी पर है।

एक यहूदी के दान से बनी ये इमारत
आपको आश्चर्य हो सकता है कि इजराइल में केनेसेट के निर्माण के लिए कई लोगों ने नहीं बल्कि ब्रिटेन के अकेले स्पेशलिस्ट ने इतना पैसा दान दिया कि आराम से तैयार हो गया। ये विशेषज्ञ थे जेम्स डी रोथ्सचाइल्ड। जो ब्रिटेन में नाबालिग थे और प्रसिद्ध रोथ्साइल्स परिवार से गोदाम रखते थे। इस परिवार का टैब विश्व स्तर पर अर्थशास्त्र में रुतबा था। के पैसे तो उनके पास कमी ही नहीं थी. यहूदियों के होने के नाते इजराइल को अपने इस देश से प्यार भी स्वाभाविक था।

इसकी तकनीक ऐसी है जहां इसे हर कोई देखता और सुनता है और चौकन्ना रहता है। सौजन्य हारेत्ज़

रोथ्सचेल्स ने इस संसद भवन के निर्माण के लिए जब 60 लाख इजराइली पाउंड की नकद राशि देने की घोषणा की तो लोग हरत में आ गए, क्योंकि ये उस समय के खाते से बहुत बड़ी नकदी थी। तब इजराइल में उभरती मुद्रा को इजराइली पाउंड कहा जाता था। हालाँकि 1980 से इस मुद्रा का नाम स्मृति सीकल रखा गया था। एक सीसीएल भारत के 20.14 रुपये के बराबर है।

09 साल में तैयार हुआ ये शानदार भवन
1957 में केनेसेट बिल्डिंग का काम शुरू हुआ। कई बड़े-बड़े वास्तुकारों के बीच जोसेफ क्लेयर बीच को चुना गया। हालाँकि उस समय इज़रायली ग्रीक शैली का शानदार भवन अपनी संसद के लिए बनवाना चाहते थे। इसे बनने में नौ साल लग गए। तब तक इजराइल में कई बार चुनाव हो चुके थे और कई सरकारी कंपनियां बनी हुई थीं। तब इज़रायल के चुने हुए मोनाइक एक छोटी सी ज्यूइस एजेंसी बिल्डिंग में स्टूडियो थे।

कैसी है ये शानदार इमारत
जब इजराइल के चौकोर आकार वाली भव्य सफेद रंग की इमारत, संसद भवन बनकर तैयार हुई तो ये विध्वंस हो गया। इसकी सुरक्षा के साथ-साथ अंदर की साज-सज्जा पर विशेष ध्यान दिया गया।
टैब 20 हजार स्क्वैयर मीटर में बनी इस बिल्डिंग में मुख्य हॉल के अलावा कई छोटे हॉल, रूम असेंबली रूम, विंग्स, लाइब्रेरी सब कुछ है। इसमें बाहर की तरफ 20 मोटे खंबे हैं तो हर तरफ 15-15। अब जब भी कोई सैलानी उसके पास आता है तो इस भवन में फिल्माया जाता है। अंदर के रंग-बिरंगे साजसज्जा और सजावट की भी झांकी की जाती है।

सुरक्षा के लिए खास एक सुरक्षा इकाई
ये पांच नाव भवन अलग ही नजर आता है. इसकी सुरक्षा दुनिया में सबसे बेहतरीन मणियां है। यूं भी इजराइल के सिक्योरिटी सिस्टम को दुनिया में सबसे ज्यादा उम्मीदें हैं।

सर्वाइव सेक्युरिटी यूनिट सुरक्षा करती है
शायद ही कोई संसद इतनी चकचौबंद और नई हाईटेक तकनीक वाली सुरक्षा से युक्त होगी, ये। इसकी सुरक्षा के लिए शील्ड पर एक डेडिकेटेड गार्ड यूनिट है, जिसे बसिव सिक्योरिटी यूनिट कहा जाता है। इस भवन के बाहर आधुनिक शस्त्रास्त्रों की भरमार है। ये रोज एक सेरेमनी करते हैं. जिसे देखने के लिए लोग पात्र हैं। अंदर की व्यवस्था कंपनियां करती हैं, जिसमें दर्शकों से लेकर मस्जिदों की आगवानी, उनके बैठने की व्यवस्था आदि शामिल हैं।

संगीत को एमके बोला जाता है
जिस तरह हम लोग अपने राक्षस को संसद भवन (एमपी) कहते हैं। इसी तरह के इजराइल के कंकाल को मेंबर ऑफ केनेसेट यानी एमके कहा जाता है। कनासेट का मतलब इजराइली संसद ही कानून है। हर संसद का कार्यकाल चार साल का होता है। वहाँ भी सांसदों और डिप्टी इंजीनियरों के लिए नियुक्तियाँ होती हैं। 18 साल से ऊपर के लोग सरकार को वोट देने के लिए वोट देते हैं. लेकिन इजराइल की संसद में खासबात वहां की कमेटियां हैं. ये कमेटियां काफी मशहूर मणियां होती हैं।

एसोसिएट्स की बिजली सेवा केनेसेट है
अगर आप इसकी तस्वीरों को गौर से देखें तो इसके पीछे की ओर कई मंजिलों पर उभरे हुए सूर्य नारायण के दर्शन होते हैं। यहां भी भारत की तरह सूरज काफी रोशनी और गर्मी देता है-यही आबनूस इस पूरे भवन में बिजली के उपकरण बनाते हैं, जिसमें बिल्डिंग की सजावट और एसी प्रणाली शामिल है।

टैग: इजराइल, संसद, संसद भवन



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