ऋषभ कौशिक/लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की अपनी नवाबी शैली, ऐतिहासिक संस्कृति और लाजिज रजिस्ट्रेशन के लिए विश्व प्रसिद्ध है। नोएडा का चौक रेलवे स्टेशन के शौकीनों का पसंदीदा बंदरगाह है, जहां अवधी और मुगलई के मिठाई से लेकर कुल्फी तक का जायका मिलता है। वहीं, भूगर्भ के मौसम में लखनऊ में एक लजीज द्वीपसमूह है, जिसे मक्खन मलाई कहा जाता है। क्या आप जानते हैं कि इस मक्खन मलाई को बनाने का तरीका और इतिहास क्या है?
मक्खन मलाई एक प्रसिद्ध डेजर्ट है, जिसे ठंड के मौसम में बनाया जाता है। इसका स्वाद अनोखा होता है. नाऊल के इतिहासकार मौलाना मसूद अब्दुल्लाह के अनुसार, मक्खन मलाई को कई मठों से जाना जाता है। दिल्ली में इसे ‘दौलत की चाट’ कहा जाता है, बनारस में इसे ‘मलइयो’ और लखनऊ में ‘नमश’ या ‘नमिश’ के नाम से जाना जाता है। ‘नमीश’ का अर्थ होता है, जो पल भर में डूब जाए। साथ ही बताया कि जैसे-जैसे शहर बदलते हैं, वैसे-वैसे स्वाद भी थोड़ा बदलता है। इसका कारण यह है कि हर जगह कुछ न कुछ अलग-अलग इंग्रेडिएंट तैयार किए जाते हैं, लेकिन इसे बनाने का तरीका हमेशा एक जैसा ही रहता है।
हिंदू राजाओं की मेज पर सती थी मक्खन मलाई
नवाब मसूद अब्दुल्लाह ने बताया कि यह डिश हिंदू राजाओं की मेज पर सज़ाती थी। उनकी रसोई से लेकर मुगलकालीन मुगलों तक ने इसे पसंद किया। यह डिश नवाबों के दौर से चली आ रही है, जिसे नासिक में ‘नमशा’ या आम भाषा में ‘मक्खन मलाई’ के नाम से जाना जाता है। इस व्यंजन का इतिहास बहुत ही रोचक है और इसका संबंध हिंदू और मुगल साम्राज्य से है।
ऐसी बनती है मक्खन मलाई
चौक के एक मशहूर कलाकार शोभित ने बताया कि मक्खन बनाने के लिए दूध का इस्तेमाल किया जाता है। इसके बाद दूध की मात्रा के हिसाब से इसमें क्रीम मिलाई जाती है। फिर मक्के का मिश्रण किया जाता है. इसके बाद इसे बर्फ के ऊपर की ओर खुले आकाश के नीचे रखा जाता है। इसके बाद दोपहर 3 बजे यह मथानी से मथा जाता है, ताकि फेना निकल सके। इसके बाद निकाले गए फेना को मिलाकर केसर, मेवा, चीनी, मिश्री प्लास्टर में फेना बनाया जाता है। इस प्रक्रिया के बाद मक्खन तैयार होता है। इसे बाजार में मक्खन मलाई के नाम से जाना जाता है।
.
टैग: खाना, भोजन 18, लखनऊ समाचार
पहले प्रकाशित : 18 दिसंबर, 2023, 16:26 IST
