राहुल मनोहर/सीकर. एक बार फिर कई साल बाद प्याज की कीमत 80 से 100 रु. किलो तक पहुंच गया था. इसे नियंत्रित करने के लिए सरकार को एकाधिकार पर रोक लगानी पड़ी। ऐसा करने से ऑनलाइन ऑनलाइन कुछ हद तक कमी हो गई। लेकिन अब 2024 में प्याज का भाव फिर से बढ़ सकता है। ऐसे में नियंत्रण पर नियंत्रण के लिए पहली बार उद्यान विभाग के किसानों से संपर्क कर प्याज का रकबा बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। लेकिन सीज़न के दौरान चार से छह रुपये किलों में प्याज वाले की सरकारी खरीद और मूल्य के रूप में कोई विकल्प नहीं दिया गया है।
इसके लिए केवल कैथेड्रल, प्रशिक्षण और प्रचार-प्रसार की दिशा-निर्देश दिए गए हैं। रकबा बढ़ाने के लिए किसानों के सामने दो बड़ी परेशानियाँ हैं। पहली बार पेज 1999 का पुरालेख सितंबर-अक्टूबर में समाप्त हुआ था। अन्य किसानों के पास बिक्री के लिए प्याज की पौध नहीं है। पिछले कुछ वर्षों से सीज़न के दौरान प्याज के भाव से किसान कार्यकर्ताओं से मुलाकात नहीं की गई है। ऐसे में इस बार करीब 30 प्रतिशत कम पौध तैयार हुई।
इस साल प्याज का उत्पादन कम रहने की संभावना
इस बार के उत्पाद के पहले यूनिट के कम रहने की संभावना है। इसका कारण यह है कि लंबे समय से सीजन के दौरान पूरे प्याज दाम न मिलने से किसान की खेती से दूर होने लगे हैं और इसकी वजह से बारिश का दौर 15 दिन पहले ही खत्म हो गया है, प्याज की शुरुआत के अनुकूल माहौल नहीं बन पाया, लेकिन अक्टूबर-नवंबर में बाजार में आने वाली महाराष्ट्र और वाराणसी की फसल भी खराब रही। निर्माण कार्य का असर अभी से बाजार में देखने को मिला है। डिक्री के अनुसार आपूर्ति से मनाही पर रोक के बाजार भाव 40-50 रुपये प्रति किला है। कंपनी का लाभ उठाने के लिए स्थानीय स्टॉकिस्ट भी सक्रिय हो गए हैं। रकबे के जिले में करीब तीन से साढ़े तीन लाख टन प्याज का निर्माण होने का अनुमान है। जबकि पिछले साल 20210 में 5.45 लाख टन प्याज का उत्पादन हुआ था। शेखावाटी के प्याज़ मंदिरों के अनुसार लघु महाराष्ट्र, कर्नाटक और मध्य प्रदेश जैसे उत्पादक राज्यों में भी प्याज़ के औसत से कम रहने की संभावना है।
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पहले प्रकाशित : 18 दिसंबर, 2023, 19:24 IST
