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बनारसी नहीं इस पान के पत्ते की है सबसे बड़ी कीमत, जानें कैसे पहचानें, क्या है कीमत?


गौहर/दिल्ली: दिल्ली के कई थोक बाज़ार और मंडियाँ राजधानी में काफी प्रसिद्ध हैं। वहीं, दिल्ली की पान मंडी भी इसी सूची में शामिल है। यह पान मंडी बाजार चौक, मुजफ्फरनगरी मस्जिद के बिल्कुल पीछे वाले सदर बाजार में स्थित है। इस पान मंडियों में देश के हर जगह से पान के शौकीन आते हैं और यही से फिर उन पान के दुकानदारों को दिल्ली और देश के अन्य राज्यों में बेचा जाता है। इस पान मंडी के उपकरण और कामकाजी लोगों ने बताया कि यह पूरी मंडी 150 से 200 साल पुरानी है।

इसी मंडी में काम करने वाले अब्दुल बारी को भी दुनिया भर में पान वाले के नाम से जाना जाता है। उन्होंने बताया कि उनकी दुकान करीब 85 साल पुरानी है और उनके दादाजी और दादाजी ने भी इसी दुकान पर पान का काम किया था। उन्होंने बताया कि केरल, कर्नाटक, बंगाल, राजस्थान, मध्य प्रदेश और उड़ीसा से ज्यादातर यहां पान के पत्ते आते हैं। साथ ही उनका यह भी कहना था कि सबसे महंगा फ्लैक्स पैन होता है जो कि बंगाल से आता है और उसे ग्रीन पैन भी कहा जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि सबसे प्रसिद्ध बनारसी पान का पत्ता से नहीं, बल्कि उड़ीसा से आता है।

पान के डॉक्टर की पहचान कैसे होती है
अब्दुल ने बताया कि जिस पान के पत्ते की डंडी सबसे मोटी होती है, वह बंगला पान होता है, और यह बंगाल से आता है। वहीं जिस पान के पत्ते की डंडी सबसे छोटी होती है, वह पान का पत्ता निकालता है और यह पत्ता भी बंगाल से आता है। इसके अलावा, लंका पान के पत्ते की डंडी परत मध्यम आकार की होती है, और यह पान का पत्ता केरल से आता है। मगर अन्य छोटे आकार का डंडी वाला पत्ता देसी पान का पत्ता होता है, और यह पान का पत्ता राजस्थान और मध्य प्रदेश से आता है। सबसे प्रसिद्ध बनारसी पान के पत्तों के बारे में उन्होंने बताया कि यह पान का पत्ता पीले और हरे रंग का होता है और इसकी डंडी भी नहीं होती है, और यह पान का पत्ता पीले और हरे रंग का होता है।

सबसे महंगा सस्ते पान का पत्ता
अब्दुल ने बताया कि 200 पान के पत्ते लगभग 1,500 से 2,000 रुपये में आते हैं। वहीं 200 लंका पैन के पत्ते 140 रुपये से लेकर 150 रुपये में आते हैं. 200 देसी पान के पत्ते 100 रुपये में, 200 बंगाली पान के पत्ते 130 से 140 रुपये में और 150 बनारसी पान के पत्ते 200 रुपये में आते हैं। वहीं उन्होंने काफी हद तक बताया कि स्टील पान का पत्ता सबसे कम बिकता है, क्योंकि वह महंगा है।

महीनों में पान के दुकानदारों की बिक्री
नवंबर, दिसंबर, मार्च और मई के महीने में सबसे ज्यादा पान के विक्रेताओं की बिक्री होती है। इसके पीछे का कारण बताते हुए अब्दुल ने कहा कि इन महीनों में मौसम काफी अच्छा होता है, न अधिक ठंड होती है, न अधिक गर्मी होती है और न ही लोग घर से बाहर रात को टहलने जाते हैं और इतना ही नहीं पान का सेवन भी होता है।

अब 50 टोबैन पान के दुकानदारों की बिक्री
अब्दुल ने बताया कि जब से सरकार ने पान के दुकानदारों की खेती की तरफ से अपना ध्यान हटाया है। तब से पान के दुकानदारों का बिजनेस भी कम हो रहा है और उसका बिजनेस भी रोजाना कम हो रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि पहले दिल्ली में 1,000 टोडा पान के पत्ते भी बिकते थे और अब मुश्किल से 50 डोडा पान के पत्ते भी नहीं बिकते हैं। उनका यह भी कहना था कि अब बहुत मुश्किल से कभी हर तरह के पान के पोस्टर मिलते हैं, पूरी मंडी में 100 डोडा पान के दुकानदारों की बिकती है। अगर आप पान लेना चाहते हैं, तो नारायण मार्केट, सदर बाजार, नई दिल्ली, दिल्ली, 110006 यहां पहुंच सकते हैं।

टैग: स्थानीय18, पान की खेती



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