दिल्ली/विद्यार्थीकैमूर : साउथ इंडियन डिश में डोसा बेहद कॉमन है और इसे हर उम्र के लोग खाना पसंद करते हैं। डोसा अमूमन देश के हर हिस्से में आपको खाने के लिए मिलेगा। डोसा बनाने का तरीका एक ही प्रकार का होता है, लेकिन इसे बनाने का तरीका अलग-अलग होता है और इसका टेस्ट भी अलग ही होता है।
दक्षिण भारत के राज्य डोसा में आध्यात्म की मात्रा अधिक रहती है, लेकिन उत्तर भारत में बनने वाले दोसा में आध्यात्म का कम प्रयोग किया जाता है। कैमूर में अगर आप साउथ इंडियन फूड डोसा का मजा लेते हैं तो आपको भभुआ के यूनिटी चौक पर गांधी स्मारक के पीछे वाली गली में आना होगा। यहां सुनील कुमार पिछले 4 साल से लोग दो-दो तरह का डोसा खिलाते हैं. जिसमें मुख्य रूप से मसाला और पनीर डोसा शामिल है.
दो तरह के दोसा बाज़ लोग खिलाते हैं सुनील
दिग्गज सुनील ने बताया कि पिछले चार सालों से साउथ इंडियन डोसा के नाम से स्टॉल चल रहे हैं। डोसा बनाने का प्रशिक्षण कहीं नहीं लिया जाता है बल्कि केवल टिप्स ही देखा जाता है। यहां आने वाले वेंट को दो तरह के पनीर और मसाला डोसा बनाते हैं।
चिकन डोसा बनाने के लिए अरवा चावल का आटा और उड़द दाल पीसकर आइसा बनाया जाता है. इसके बाद रिफाइन डेक तवा पर कीचड़ फैल गया। जब खास्ता होता है तो ऊपर से टमाटर, लाल मिर्च और धनिये के मिश्रण से तैयार मसाला डाला जाता है. साथ ही आलू और कदीमा से बनाया हुआ मसाला भी मिलाते हैं.
इसके बाद इसके ऊपर गाजर, मुली, प्याज और धनिया के पत्तों को सर्वसम्मति से कर दिया गया, बाद में अंत में इलेक्ट्रोनिक कटा हुआ पनीर के टुकड़ों को कुछ देर से पकाने के बाद उसे स्टॉक कर लिया गया। साथ में नारियल की चटनी और साँचे देते हैं। इसका स्वाद ऐसा है कि जो एक बार खाता है तो बार-बार खाने के लिए आता है।
5 से 6 हजार तक रोजाना डोसा की बिक्री होती है
सुनील ने बताया कि मसाला डोसा के लोगों को 50 रुपये में तो पनीर वाला डोसा को 60 रुपये में लोग कोटे होते हैं। रोजाना दोपहर 2 बजे दुकान खोल कर ले जाते हैं और रात 9 बजे तक रहते हैं। लोग सबसे ज्यादा पनीर डोसा ही पसंद करते हैं और शाम को खाने के लिए भीड़ लग जाती है. प्रतिदिन 100 प्लेट से अधिक की बिक्री होती है। दो तरह के डोसा की बिक्री प्रतिदिन 5 से 6 हजार तक हो जाती है।
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पहले प्रकाशित : 19 दिसंबर, 2023, 14:20 IST
