स्वदेशी इंसुलिन: देश में अब 100 प्रतिशत भारतीयों से मुलाकात हो रही है। वहीं अच्छी बात ये है कि इसके मार्केटर अन्य ब्रांड्स के मुकाबले कुछ कम चाहते हैं। हाल ही में यूएसवी ने भारत में बायोसिमिलर इंसुलिन एस्पार्ट इनसुकविक के लिए बायोजेनोमिक्स के साथ भागीदारी की है।
भारत में आज सबसे बड़ी बीमारी बिजनेस बिजनेस है। इस समय देश की करीब 11.4 प्रतिशत विस्कॉन्सिन आबादी यानी करीब 11 करोड़ लोग काम पर लगे हुए हैं। इसके अलावा करीब 13 करोड़ लोग प्री-डायबिटिक हैं और बहुत कम समय में इनकी स्थिति तक पहुंच सकती है।
जानकारी के अनुसार इनसुकविक मेक इन इंडिया प्रोडक्ट्स का विकास और निर्माण 100 स्वदेशी तकनीक से किया गया है। बैस्टम क्लिनिक प्रोग्राम के द्वारा इसकी वर्ल्डक्लास रेक्टैलिटी को प्रमाणित किया गया है। यह सभी महानगरों और पहले-दूसरे स्तर के शहरों में भी उपलब्ध है।
प्रशांत तिवारी, ऑटोमोबाइल प्रबंधन, यूएसवी प्रा. लिमिटेड ने बताया, ‘हम मरीजों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाना चाहते हैं। ओरल एंटी-डायबिटीज सेगमेन्ट में लीडर होने के गुण इंजेक्ट टेबल सेगमेन्ट में प्रवेश से भारत की स्थिति और अधिक मजबूत बनेगी। हमने बायोजेनोमिक्स के साथ विश्वव्यापी गुणवत्ता के इंसुलिन एस्पार्ट की भागीदारी की पेशकश की है।
ये सरकारी नौकरी
इन्सुक्विक कार्ट्रिज- 700 रुपये
इनसुकविक वीडियो पैन- 915
इनसुक्विक वायल- 2321
वहीं डॉ. संजय सोनार के सह-संस्थापक और अध्यक्ष बायोजेनोमिक्स ने कहा कि इंसुलिन एस्पार्ट रैपिड-एक्टिंग इंसुलिन श्रेणी में पहला बायोसिमिलर और वैज्ञानिकों के अनुसंधान एवं विकास का परिणाम है। वहीं बायोजेनोमिक्स के सह-संस्थापक और निदेशक डॉ. आर्कन कृष्णन का कहना है कि यह 100 प्रतिशत मेड इन इंडिया है, जिसे फाइनप्रिंट जैली हीले के स्वदेशी तकनीक से बनाया गया है।
खास बात यह है कि इंसुविक कार्टिज, वायल और प्रीफिल्ड पैसेंजर पैन में उपलब्ध होंगे, इस तरह के मरीजों को उनकी जरूरत के अनुसार विकल्प मिलेगा। पैन आधुनिक और लेटवेट डिजाइन के हैं।
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पहले प्रकाशित : 20 दिसंबर, 2023, 19:52 IST
