Homeहेल्थ & फिटनेस1000 करोड़ रुपये की कीमत में 10 करोड़ रुपये की कीमत

1000 करोड़ रुपये की कीमत में 10 करोड़ रुपये की कीमत


उत्तर

अगर आप सोच रहे हैं कि ज्यादा ठंड है तो ज्यादा पानी पीने की जरूरत नहीं है तो आप पूरी तरह से गलत हैं।
सूजी-मैदा जैसे कि आलू से ये सभी पोषक तत्त्व निकलते हैं।

ठंड के मौसम में तंत्रिका दर्द से निपटने के उपाय: देखते ही देखते कई लोगों को परेशानी हो जाती है। कुछ लोगों की सबसे बड़ी कलाकृतियाँ दिखाई देती हैं और इस कारण उनकी नसें रंगीन तस्वीरें दिखाई देती हैं। इस कारण वे कोई काम सही से नहीं कर पाते हैं। हालाँकि, जब तापमान बहुत कम होने लगता है तब शरीर अपने इनर्यूनी काम में ब्लडर्क स्रोजन (रक्त परिसंचरण) को तेज़ कर देता है। इस कारण शरीर के बाकी हिस्सों में सर्कोशन कम होने लगता है। इससे हाथ और पैर की नसें खूबसूरत दिखती हैं। एक तरह से रेलवे में होल्डन या सेन्ट्रलपना होना दिखाई देता है। इन सभी चीजों से ठंड ज्यादा लगती है और शरीर में ठंडक कम हो जाती है।

ठंड में नसें कमजोर क्यों होती हैं (सर्दियों में नसें कमजोर क्यों होती हैं)

अपोलो हॉस्पिटल, कॉलेज के प्रमुख प्रमुख वास्तुशिल्पी डॉ. प्रियांक रोहतगी उन्होंने बताया कि नर्व कंज्यूमर के बाद सबसे ज्यादा ठंड होती है। नर्व या नसें एक तरह से एकमात्र तार है जिससे इलेक्ट्रिक इंपल्स और सिग्नल मस्तिष्क तक प्रवाहित होते हैं और मस्तिष्क से पूरे शरीर तक प्रवाहित होते हैं। नसें ही इलेक्ट्रिक और इलेक्‍ट्रोइटाइड की शुरूआत होती है। अधिक ठंड होने के बाद शरीर को मानक टेंपरेचर में लाने के लिए तापमान को मुख्य उपयोग में खर्च करना पड़ता है। इस कारण से अन्य स्थानों पर स्टॉक स्टॉक कम हो जाता है। नर्व में सेंसेशन कम हो जाता है। इसे नासें क्लासिकल रूप दिया गया है और इसमें दर्द का एहसास भी कम होने लगता है। यही कारण है कि नसें सेन्ट्रल होना पर चुस्ती या फुर्ती बहुत कम हो जाती है।

नसें मजबूत बनाने के लिए डॉक्टर के नाम तरकीब

1. पूरा शरीर ढका हुआडॉ. प्रियांक रोहतगी कहा जा रहा है कि ठंड में शरीर को गर्म रखने के लिए और शरीर को गर्मी से बचाने के लिए सबसे पहले पूरे शरीर को गर्म कपड़े से ढक कर रखना चाहिए। अगर शरीर को मोटा कर नहीं दिया जाए तो ठंडे शरीर में घुसेगा जिससे शरीर को सामान्य टेंपरेचर में लाने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ेगी। इसलिए बाहर बाजार हैं तो शरीर को आकर्षक कपड़े से ढके कर रखें।

2. विटामिन बी-रेलवे को सेन्ट्रल बनाने में विटामिन बी 12 की कमी का बहुत योगदान रहता है। यदि विटामिन बी 12 की कमी है तो मौसमी लोगों की नासें भी ठंड में मौजूद रहती हैं। इसलिए विटामिन बी के लिए हरी पत्ती की सब्जी, पौष्टिक फल, दूध, अण्डा, मुनक्का, छाछ, दालें, चिकन, फलीदार सब्जी का सेवन करें।

3. मैग्नीशियम-सर्दी में लंज-पंज न हो, इसके लिए मैग्नीशियम की आपूर्ति बहुत जरूरी है। मैग्नीशियम की कमी से भी नसें ख़राब हो सकती है। मैग्नीशियम के प्लांटेशन के लिए नियमित रूप से एवोकाडो, बादाम, फलीदार फैक्ट्री, कद्दू के बीज, टोफू, साबुत अनाज, कॉम्बिनेशन मछली, केला, हरी पत्तीदार सब्जी आदि का सेवन करना चाहिए।

4. गेंहू, जौ, ज्वार के छिलके-डॉ. प्रियांक रोहतगी का कहना है कि शरीर में विटामिन बी और मैग्नीशियम की कमी नहीं होनी चाहिए। हरे पत्ते के पत्तों में विटामिन बी और मैग्नीशियम दोनों पाए जाते हैं लेकिन पानी में साबूत होने के कारण इसका ज्यादातर हिस्सा निकल जाता है। इसलिए छिलके वाला साबुत अनाज इसमें सबसे ज्यादा स्वादिष्ट होता है। इसके लिए जेनहू, ज्वार, जौ आदि अनाजों से युक्त अनाजों की अधिकता होती है, उन्हें सामान्य तरीके से पीसकर उनकी रोटी बनाई जाती है। इसमें मौजूद विटामिन या मैग्नीशियम का अर्क नहीं। यानी जेनहू, जौ, ज्यूर आदि के आटे से बनी रोटियां स्थायी। इसमें आलू का आटा भी शामिल है. सूजी-मैदा जैसे कि आलू से ये सभी पोषक तत्त्व निकलते हैं।

5. पानी-अगर आप सोच रहे हैं कि ज्यादा ठंड है तो ज्यादा पानी पीने की जरूरत नहीं है तो आप पूरी तरह से गलत हैं। फ़्रैफ़ रेलवे को रेलवे से सुरक्षित रहने के लिए शरीर में पानी की आवश्यकता होती है। पानी न पीने से शरीर में तरलता का संतुलन बना रहता है।

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