तनुज पाण्डे/आदिवासी। पहाड़ी नीम के नाम से जाना जाता है पहाड़ी पहाड़ी तिमूर का पौधा। कई औषधीय मिश्रणों से युक्त के कारण इसका प्रयोग कई तरह की छोटी बड़ी दवाओं के इलाज के लिए किया जाता है। इसका प्रयोग दांतों को मजबूत बनाने से लेकर ब्लड शुगर और शुगर की दवा के रूप में भी किया जाता है।
उत्तराखंड में स्थित डीएसबी कॉलेज के वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉक्टर ललित तिवारी ने बताया कि पहाड़ में पाया जाने वाला तिमुर के उपचार का वानस्पतिक नाम जेनेथोजयलम अर्मेटम है। तिमुर के उपचारों का आध्यात्मिक महत्व भी सर्वत्र है। ऐसा माना जाता है कि घर के दीये में रखने से घर में नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव नहीं पड़ता है यानी घर पर बुरी नजर नहीं पड़ती है। इसके अलावा सनातन धर्म में यज्ञोपवीत संस्कार (जनेऊ) के समय बटुक के हाथ में इस तैमूर के नाम को रखा जाता है। सिद्धांत यह है कि तिमूर में सभी गुण होते हैं और इसकी लकड़ी अत्यंत पवित्र मानी जाती है। हिमालयी यूरोप में रहने वाले साधु-संत भी तैमूर की लकड़ी को हमेशा अपने पास रखते हैं।
हाई ब्लड डिस्चार्ज का रामबाण इलाज
तिमुर के उपचार को पहाड़ी नीम भी कहा जाता है। इसके फल, तानियाँ और पत्ते, बीज, छाल सभी औषधीय रूप में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इसके अलावा इसके विद्यार्थियों का उपयोग दातून के रूप में किया जाता है। उपस्थित चिकित्सक के कारण यह शरीर में हाई ब्लड प्रेशर को कम करने का काम करता है।
प्रयोग के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है
प्रोफेसर तिवारी ने बताया कि तैमूर का इस्तेमाल अक्सर किया जाता है। इसके अलावा इसके बीज पेपरमेंट का काम करते हैं, जो दांत और मसूड़ों को मजबूत बनाते हैं। तैमुर के उपचार के पत्ते एंटीसेप्टिक का काम करते हैं। इसके बीज के साथ ही जुकाम, दस्त, त्वचा रोग के साथ माउथ फ्रेशनर का भी काम किया जाता है। इसके अलावा टिमूर पाचन में भी बेहद सहायक है। इस उपाय के बारे में बताया गया है। उत्तराखंड के पहाड़ी इलाके में पाया जाने वाला तैमूर स्वास्थ्य के लिए काफी शानदार है।
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पहले प्रकाशित : 22 दिसंबर, 2023, 14:07 IST
