नरेश पारीक/चूरू: राजस्थान का खान-पान और यहां की माटी की महक कुछ ऐसी ही है जो यहां देशी और विदेशी भी खींच लाती है। लोक से साराबोर राजस्थान का पारंपरिक संस्करण यहां की विशेष पहचान है और इसमें पार खान-पान भी शामिल है। यहां बनने वाली रबड़ी, जी हां बाजारे की रबड़ी दिलचस्प बात तो ये है कि यहां की रबड़ी को यहां के समर के खान-पान में भी मुख्य रूप से शामिल किया जाता है तो असल में भी इसे जहरम का रामबाण का इलाज बताया जाता है।
दिल की हालत में है कमाल
अपने लजीज स्वाद के साथ ये रबड़ी झोपड़े से लेकर 5 स्टार स्टाइल में भी शानदार है। दूधवाखारा गांव के महान दाधीच स्मारक बाजारे की राबड़ी की तासीर गर्म रहती है ऐसे में इस झील में खान-पान के साथ उत्तम पेय है। दाधीच के आंकड़े बाजरे में प्रचुर मात्रा में होते हैं जो पाचन में होते हैं जिससे कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम हो जाता है और दिल की लालसाएं खतरनाक नहीं रहतीं।
उच्च रक्तचाप और प्लास्टिक की दुकान के लिए भी यह बहुत आकर्षक है। लॉन्च की सुरक्षा के लिए भी इसका इस्तेमाल काफी अच्छा माना जाता है। बाजरे में आयरन भी बहुत अधिक मात्रा में होता है जिससे खून की कमी होने वाला रोग भी नहीं होता है।
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ऐसे डेड राबड़ी
बाजार को अच्छी तरह से ढोकर निथारकर छोड़ दे कुछ समय बाद ओखली या मक्सी की सहायता से धरहरा पीस लें जिसके बाद ताजा दही या छाछ में धरधरा पिसा हुआ बाजार डाल दे। नमक और थोड़ी सी चीनी डाल दे। कच्चे माल पर पकाते रहे तो वही कुछ लोग इसमें दूध और घी भी डालते हैं। राबड़ी जहां आपके पेट के लिए अच्छा रहेगा वहीं ये शरीर में ऊर्जा बढ़ाने का भी काम करेगा।
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पहले प्रकाशित : 22 दिसंबर, 2023, 18:03 IST
