अर्थशास्त्र सेजू/बाडमेर। समुद्र में तिल और गुड़ से बने चॉकलेट का कॉकटेल इसलिए खाया जाता है क्योंकि दोनों की ही तासीर गर्म होती है। सर्दियाँ शुरू होती हैं ही बाजार में भी तिल और गुड़ से बने व्यंजन से बेचे जाते हैं। साथ ही तिल के बने मॉडल की मांग बढ़ी है. खासकर तिल से बनी सैलानी की डिजाईन बढ़ जाती है। गरीबों से आए प्रभुलाल तिलों की घाणी आंध्र सैलानी बने हुए हैं, जो इन दिनों खूब बिक रहे हैं।
पश्चिम राजस्थान के मिडिल जिलों में तिल और तिल के साथ ही गर्म तासीर वाले गुड़ और तिल के टुकड़े की सजावट की जाती है। सरहदी सोसाइटी में दो माह की मीटिंग वाली सैलानी की खूबसूरत दुकान बनी हुई है। आप इसे घर पर भी बना सकते हैं। इनमें काजू, बादाम, तेल और खसखस मिलाने के बाद स्वादिष्ट बन जाता है। विशेष रूप से जैसलमेर-जैसलमेर में इसका डिज़ाइन काफी रहता है।
260 रुपए प्रति किला मिठाई का भाव
असल, सैलानी के लिए तिल को आधा पीसकर मिलाकर काजू, बादाम, गुड़ के टुकड़े बनाए जाते हैं और गर्म-गर्म इसकी तासीर और बेहतरीन स्वाद के साथ इसे काफी पसंद किया जाता है। प्रभुलाल का कहना है कि सर्टिडियो में इसके डिजायनर सबसे ज्यादा रहते हैं इसलिए इस सीजन में वह तिल के इन सामानों का कारोबार करते हैं। प्रोजेक्ट से बातचीत 2 माह तक सैलानी यहां बेच रहे हैं। यह सैलानी 260 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिकती है।
50 से 100 ग्राम लेकर चख रह रहे लोग
गुड़ मेवा वाली इस सैलानी का जायका ऐसा है कि अपने ठेले पर प्रभुलाल रोजाना 20 बच्चे तक यह आइटम बेच रहे हैं। यानी 5000 रुपए की सैलानी रोज अपने ठेले पर बिक रही है। उनकी थाली पर आप प्रति किलो के साथ ही एक प्लेट या 50 से 100 ग्राम की मात्रा में भी खरीद कर सकते हैं। इसके साथ ही प्रभुलाल तिल का तेल भी 350 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेच रहे हैं। विशेष रूप से समुद्र के मौसम में इस तेल की खपत बढ़ती है।
.
टैग: Barmer News, भोजन 18, स्थानीय18, राजस्थान समाचार
पहले प्रकाशित : 22 दिसंबर, 2023, 22:36 IST
