मोहित शर्मा/करौली. इलेक्ट्रिक से डॉक्टरों के दम पर तो आपने कई सब्जियों से खरीदे होंगे फल। लेकिन, आज हम आपको सीजन के अनुसार उगने वाले एक ऐसे ही खास फल के बारे में बताने जा रहे हैं। इसका आनंद राजस्थान के करौली में डांग क्षेत्र के लोग पूरे 2 महीने बिल्कुल मुफ्त में इसके स्वाद का नजारा देखते हैं।
कटीली झाड़ियाँ समुद्र तट के दिनों में अपने आप में ही पैदा होती हैं और स्वाद में आश्रम-मीठे लगने वाले इस फल को आम तौर पर बेर कहा जाता है। मगर डांग क्षेत्र के लोग इसे जंगल का सेब कहकर भी बुलाते हैं। हालांकि शहर के फल बाजार में यही बेर 50 से 60 रुपए किलो तक बिकता है। मगर करौली डांग क्षेत्र के लोग इस फल का 2 महीने तक फ्री में स्वाद लेते हैं। वहीं कई लोगों के लिए फल अध्येता का भी सहारा बनता है।
स्वाद में बेर के नाम का यह फल, कट्टा मीठा, आकार में छोटा और केंटदार झाड़ियाँ के बीच पैदा होता है। इसका स्वाद लेने के लिए लोगों को कंटों से भी टक्कर लेनी पड़ती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह इंसानों और जीवों दोनों को बेहद पसंद आती है। कुछ लोगों का तो ऐसा भी कहना है कि भगवान राम भी इस फल के भक्त रह चुके हैं।
जूतों के दिनों में उगना शुरू हो जाता है
डांग क्षेत्र के स्थानीय निवासी राजेश शर्मा का कहना है कि बेर नाम का यह फल बाजार में दिनों से आना शुरू हो जाता है और इसके आसपास बिल्कुल तैयार हो जाता है। आदिम जानवर और इंसान दोनों ही हैं। उनका कहना है कि हमारे डांग क्षेत्र में तो यही फल जंगल का सेब है। शहरों में यह फल 50 से 60 रुपये की कीमत पर है लेकिन करौली के डांग क्षेत्र में यह बार 2 महीने बिल्कुल मुफ्त है।
शबरी के आश्रम में भगवान राम ने भी खाया था ये फल
शर्मा ने बताया कि भगवान राम ने भी शबरी के आश्रम में इसी बेर का नाम राजेश के नाम पर रखा था। जिसका स्वाद खट्टा-मीठा होता है. उन्होंने बताया कि हमारे डांग क्षेत्र में इस बैर नाम का फल स्वयं : ही पैदा होता है। बिना बीज डाले ही यह फल रेगिस्तान में समुद्र के मौसम में भारी मात्रा में पैदा होता है।
शर्मा ने बताया कि हमारे डांग क्षेत्र में तो इस फल की भारी आवक होने के कारण इसका कोई मोल भी नहीं है। इन दो महीनों में तो डांग क्षेत्र में यह जंगल इतनी प्रचुर मात्रा में मौजूद है कि सभी इसका मजा मुफ्त में लेते हैं। बस टूटने में कंप्लेंट के कारण थोड़ी बहुत बेचैनी होती है लेकिन इसे देखते ही लोगों के मन में इसे खाने की इच्छा पैदा हो जाती है।
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औषधीय गुणों से भरपूर होता है
चलो, बैर के मित्र की तो यह खट्टा मीठा फल शास्त्र में बात भी कम नहीं है। आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. वर्म शर्मा का कहना है कि बैर का यह फल कई शर्तिया रामबाण का इलाज है। इसमें संतरे से भरपूर विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट भी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
प्रतिरक्षा को मजबूत बनाने में यह फल सहायक होता है। उनका कहना है कि मोटी अच्छी मात्रा में पाये जाने के कारण यह कम और विटामिनों से परिपूर्ण होने के कारण स्क्रीन पर भी सामने आती है। पेट से संबंधित दवाओं के लिए भी यह बैर काफी स्वादिष्ट और सही मात्रा में है इसके सेवन से तनाव और चिंता भी दूर हो जाती है।
(अस्वीकरण: इस खबर में दी गई औषधि/औषधि और स्वास्थ्य बेनिटिट रेसिपी की सलाह, हमारे सिद्धांतों से जुड़ी चर्चा के आधार पर है। यह सामान्य जानकारी है, कोई व्यक्तिगत सलाह नहीं। हर व्यक्ति की आवश्यकताएं अलग-अलग हैं, इसलिए डॉक्टरों से सलाह के बाद ही, किसी भी चीज का उपयोग करें। कृपया ध्यान दें, लोकल-18 की टीम के किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए कोई जिम्मेदारी नहीं होगी।)
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पहले प्रकाशित : 22 दिसंबर, 2023, 17:13 IST
