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बजरंग पूनिया ने पद्म श्री पुरस्कार लौटाया है।
हालाँकि प्रतिष्ठित पुरस्कार को लौटाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
नई दिल्ली: ओलंपिक पदक विजेता बजरंग पुनिया विरोध स्वरूप अपना पद्म पुरस्कार ‘वापस’ करने वाले पहले व्यक्ति नहीं हैं। हालाँकि पिछले कुछ वर्षों में उन सभी लोगों की तरह,चाहते हुए अपना पद्म सम्मान ‘लौटा’ दिया गया है, वह भी अपनी तरह के पुरस्कारों की सूची में बने हुए हैं। क्योंकि प्रतिष्ठित पुरस्कार को लौटाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार एक अधिकारी ने बताया कि ‘पुरस्कार विजेता किसी भी कारण से पुरस्कार वापस ले सकते हैं, लेकिन पद्म पुरस्कार में ऐसे नियम नहीं हैं। बिना कारण केवल राष्ट्रपति द्वारा घोषित पुरस्कारों को रद्द किया जा सकता है। पुरस्कार विजेता का नाम राष्ट्रपति के अधीन निर्मित पद्म प्राप्त रॉबर्ट्स के रजिस्टर में तब तक दर्ज किया जाता है, जब तक उनका पुरस्कार रद्द नहीं किया जाता।’
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क्या है नियम
स्कॉल्ड है कि सामान्य पुरस्कार के अनुसार, पद्म पुरस्कारों से सम्मानित लोगों के लिए प्रस्तावित व्यक्ति की इच्छा, पुरस्कारों की घोषणा से पहले, सौम्य अविश्वसनीय रूप से आश्वस्त की जाती है। इस बिंदु पर कई लोगों ने पुरस्कार के लिए आवेदन किया है। किसी व्यक्ति को पद्म विभूषण, पद्म रत्न या पद्म श्री से अलंकृत किए जाने के बाद, उसका नाम भारत के राजपत्र में प्रकाशित किया जाता है और ऐसे प्राप्त एसोसिएशन का एक रजिस्टर रखा जाता है।

एक अधिकारी ने आगे कहा, ‘भले ही पुरस्कार विजेता के बाद पद्म पुरस्कार वापस लेने के लिए ली जाने वाली फीस से उसका नाम राजपत्र या पुरस्कार विजेता के रजिस्टर से नहीं हटाया जाता है।’ पद्म पुरस्कारों की ‘वापसी’ से जुड़ा है सबसे पुराना मामला पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और पूर्व केंद्रीय मंत्री एसएस ढींढसा के थे। उन्होंने साल 2020 में राष्ट्रपति को पत्र लिखकर कहा था कि वे तीन कृषि मंत्री किसानों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे एकजुटता दिखाते हुए अपने पुरस्कार ‘वापस’ कर रहे हैं। संयोग से, क्लाउड और ढींढसा का नाम अभी भी पद्म पुरस्कार विजेताओं की सूची में शामिल है।
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पहले प्रकाशित : 23 दिसंबर, 2023, 08:04 IST
