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काले गोरे का भेद नहीं…इसी सिद्धांत पर चली अदालत, तलाक मांग रहे पति को धोखा


सौरभ तिवारी/बिलासपुरः कोर्ट-कचहरी में पति-पत्नी के बीच अलग-अलग मामलों को लेकर तलाक लेने की याचिका दायर की जाती है। इनमें से कई मामले जायज भी होते हैं, तो वहीं कई बार अनर्गल नी को लेकर लोग तलाक के लिए कोर्ट में भर्ती हो जाते हैं। ऐसा ही एक मामला हाल ही में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में आया, जहां जज ने प्रार्थी को जमकर फटकार लगाई।

ये था पूरा मामला
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में एक शख्स ने अपनी पत्नी से तलाक के लिए अर्जी दी थी। पति का कहना था कि उसकी पत्नी उसे छोड़कर चली गई है और अब वापस घर लौटने पर भी उसे मना नहीं किया है। इस वजह से शख्स अपनी पत्नी से तलाक चाहता था. वहीं इस मामले में पत्नी का कहना था, कि उसका पति उसे नापसंद करता था। साथ ही उसकी त्वचा के रंग का मजाक उडकर ने उसे अपशब्द कहा था। इस कारण पत्नी से चली गई थी अपनी फ्रेंचाइजी वापस नहीं लौटना चाहती थी. वहीं पति अब इस बात को लेकर टूटे हुए तलाक की मांग कर रही है।

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कोर्ट ने खूब लताड़ा
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस गौतम भादुड़ी और जस्टिस दीपक कुमार की बेंच ने सुनवाई के दौरान पति को भारी भीड़ में फंसाया और कहा कि रंग के आधार पर तलाक नहीं दिया जाएगा। पत्नी के घर से जाने का जिम्मेदार पति खुद है, इसलिए उसे तलाक नहीं दिया जा सकता। वहीं कोर्ट ने इस मामले में फेयरनेस क्रीम कंपनी पर भी टिप्पणी की और कहा कि इन कंपनियों की वजह से समाज में रंगभेद पैदा होता है और क्रीम से गोरेपन की तरह को लेकर अंधविश्वास बढ़ा है।

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