रजत भट्ट/गोरखपुर: मौसम में आ रहे बदलावों का स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। इन दिनों जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में कई ऐसे पेशेंट आते हैं, जो ब्रेन हेमरेज़ और डिज़ालिन में सिर दर्द के शिकार पाए जा रहे हैं। वनवासी लोगों द्वारा बेहतर इलाज का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही सलाह दी जा रही है कि खुद का बचाव कैसे करें। वह ठंड के सीज़न में खस करके क्लिज़न और ब्रेन हेमरेज जैसी चुनौतियों से बचने के लिए खुद को तैयार रखता है। जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में आने वाले मरीजों को, न्यूरोलॉजिस्ट की सलाह के साथ उन्हें मुक्ति का भी सुझाव दिया जा रहा है।
गोरखपुर जिला अस्पताल के वरिष्ठ मनोचिकित्सक पुतिन पटेल का कहना है कि फ़्लोरिडा के सीज़न में ब्रेन स्ट्रोक का ख़तरा सबसे ज़्यादा बढ़ जाता है। इसका मुख्य कारण यह है कि ठंड के मौसम में नास से खून बहता है। उन्होंने और लोगों का बीपी बढ़ने का चित्रण किया है। बीपी बढ़ने से ब्रेन स्ट्रोक के खतरे में बढ़ोतरी हो रही है। वहीं सीएमओ सीजन आशुतोष ने बताया कि ठंड में ब्रेन स्ट्रोक और डायरिया की समस्या प्रमुख है। इसके लिए लोगों को नियमित रूप से गर्म पानी का इस्तेमाल करना चाहिए। गर्म कपड़े पहनना चाहिए। साथ ही हर एक दवा डॉक्टर की सलाह पर ही लेनी चाहिए।
जोखिम से बचने के लिए करें ये उपाय
इन दोनों ब्रेन क्रॉमिक और क्रॉनिक जैसे रिश्तेदारों से पीड़ित पीड़ित की लॉन्ग क्वॉर्टर हॉस्पिटल डिस्ट्रिक्ट मेडिकल कॉलेज में लग रही है। अपूर्ण डिफ़ेक्शन के लिए योग्यता और डॉक्टर अपनी सलाह दे रहे हैं। जिसमें खास बात करके इन दिनो लोगों को लक्ष्यों के साथ खान-पान पर ध्यान देना चाहिए। वहीं जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में 8 से 10 छात्र ब्रेन स्ट्रोक के आ रहे हैं।
इसमें खास बता कर 50 से ऊपर वाली उम्र की संख्या बहुत ज्यादा है. मरीज़ों के आने के बाद विशेषज्ञ भी उन्हें सलाह दे रहे हैं कि ठंड के मौसम में विशेष रूप से बीपी शुगर के मरीज़ों को सहारा देना होगा। आपके शरीर को गर्माहट मिलेगी और खान-पान पर विशेष ध्यान देना होगा।
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पहले प्रकाशित : 23 दिसंबर, 2023, 16:33 IST
