रामकुमार नायक/रामकुमार नायक. धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ के किसान अब धान की दुकान की भी खेती कर रहे हैं। असल में, छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के छोटे किसान यहां व्यावसायिक खेती से फ़्लोरिडा की खेती कर रहे हैं। जिले का मिश्रणराबाद गांव ट्रॉली की खेती के लिए किसी भी परिचय का मोहताज नहीं है। यहां हर दूसरी किसान सब्जी की खेती की जा रही है। इनमें से अधिकांश किसान ऐसे हैं जिनके पास दो चार जंगली खेत हैं, खेती की खेती कर खूब मुनाफा कमा रहे हैं। आज हम आपको एक ऐसे ही छोटे किसानों से मिलाने वाले हैं, जिन्होंने आश्रय स्थल पर फूलगोभी के नाम से लाखों की रकम जुटाई है।
महासमुंद जिले के मिलाराबाद गांव के किसान रेशमलाल साहू ने करीब 15 साल पहले पारंपरिक खेती यानी घर, धान, दल्हनी खेती के अलावा ठेले की खेती करना शुरू किया था। पुराने जमाने की टिकरा जमीन पर इन दिनों फूलगोभी की सब्जी लगी हुई है। जब से सुपरमार्केट की खेती शुरू हुई है, तब से एक अच्छा प्रदर्शन हो रहा है। छत्तीसगढ़ में पिछले तीन-चार वर्षों से सब्जी की खेती का रकबा लगातार बढ़ रहा है। खेती की खेती ज्यादातर वह किसान कर रहे हैं, जिनके पास कम खेत हैं। किसान एक साल में तीन मशीनरी उगाते हैं और अच्छी कमाई कर रहे हैं। मिलाराबाद गांव के रेशमलाल साहू भी इसी जमीन पर मक्के के सिक्के हैं, फिर इसे काटने के बाद फूलगोभी के सिक्के हैं।
➡️हालात की खेती में कम लागत
किसान रेशमलाल साहू ने आगे बताया कि खेती की तुलना में खेती की लागत कम होती है। फूलगोभी की सेमिनिश गिरजा वैरायटी से अच्छा उत्पाद है। इसके बीज की 10 ग्राम की कील में 400 रुपए मिल जाते हैं जिससे लगभग 2500 पौधे लगते हैं। लगभग 2 चाक में नारियल के पौधे हैं।
पिछले महीने इसी महीने में लॉकडाऊन की फ़सल बेंच पर 1 लाख 30 हज़ार का स्टॉक हुआ था। 15 साल से रेशमलाल साहू की खेती कर रहे हैं। घोड़े की खेती में सबसे ज्यादा मुनाफा है. आजकल बाजार में फूलगोभी का चिल्लर भाव 60 से 65 रुपए प्रति किला चल रहा है, वहीं थोक भाव 40 रुपए से लेकर 45 रुपए प्रति किला चल रहा है। फूलगोभी की खेती करने वाले किसान रेशमलाल बेहद खुश हैं।
.
टैग: बिहार के समाचार, स्थानीय18, सफलता की कहानी
पहले प्रकाशित : 24 दिसंबर, 2023, 08:27 IST
