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खाना खाते ही आते हैं खट्टी डकार? पेट में भी रहता है भारीपन, नियमित करें ये 6 योगासन, तुरंत मिलेगा आराम


उत्तर

खट्टी डकार की समस्या तब होती है, जब पेट अतिरिक्त एसिड का उत्पादन करने लगता है।
इस समस्या में सीने में जलन, अपच, गैस और पेट में भारीपन जैसे लक्षण होते हैं।

हाइपरएसिडिटी के लिए योग: अनहेल्दी लाइफस्टाइल और अनहेल्दी वर्जन कई गंभीर सैटलेबल की वजह है। हाइपरएसिडिटी भी एक है. यह समस्या तब उत्पन्न होती है, जब पेट में अतिरिक्त एसिड का उत्पादन होना प्रतीत होता है। आयुर्वेद में इसे अम्लपित्त के नाम से भी जाना जाता है। हाइपरएसिडिटी की समस्या होने पर सीने में जलन, अपच, गैस, खट्टी डकार और पेट में भारीपन जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं। दरअसल, कई लोगों की शिकायत है कि प्रभाव पड़ने पर ही खट्टी डकारें आनी शुरू हो जाती हैं। इससे संबंधित उपकरण पाने के लिए लोग बाजार से स्कार्पियो लेंगनी शुरू कर रहे हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि खट्टी डकार की समस्या को दूर करने के लिए योग सहायता हो सकती है? आइए जानते हैं हाइपरएसिडिटी से राहत पाने के योगासन के बारे में-

हाइपरएसिडिटी से जुड़ेंगे ये 6 योगासन

वज्रासन: हेल्थलाइन के अनुसार, व्रजसन का अभ्यास पेट से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए बेहद प्रभावशाली होता है। इस योगासन को करने से पेट और पेट में ब्लड सर्कुलेशन माप बना रहता है। ऐसी स्थिति में भोजन आसानी से पच जाता है। इस अभ्यास को नियमित करने से हाइपरएसिडिटी, गैस और कब्ज की समस्या से राहत मिल सकती है।

बालासन: हाइपरएसिडिटी की समस्या से निजात पाने के लिए बालासन सर्वोत्तम है। बता दें कि बालासन को प्लांट के नाम से भी जाना जाता है। यह पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। इससे पेट के अंदरूनी ऑपरेशनों को देखने में भी मदद मिलती है। बालासन से थकान और तनाव दूर होने के साथ हाइपरएसिडिटी से भी राहत मिलती है।

वेस्टोत्तानासन: पेट से जुड़े उपकरणों से लेकर उपकरण पाने के लिए आप वेस्टोत्तानासन की मदद ले सकते हैं। इस योग को करने से पाचन तंत्र को प्रभावित किया जाता है और पेट क्षेत्र में रक्त शर्करा के स्तर को भी बढ़ावा मिलता है। इसके अलावा, वेस्टोत्तानासन अभ्यास से गैस और एसिडिटी के नुस्खे को दूर करने में मदद मिल सकती है।

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अर्ध मत्स्येन्द्रासन: हाइपरएसिडिटी से राहत पाने के लिए आपको अर्ध मत्स्येन्द्रासन अवश्य करना चाहिए। यह एक अनोखा योगासन है, जो ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है। साथ ही शरीर से बिजनेसमैन को बाहर निकाला जाता है। नियमित इस अभ्यास से पाचन क्रिया में सुधार होगा और पेट से संबंधित पोषक तत्वों की छुट्टियाँ हो सकती हैं।

पवनमुक्तासन: बॉवेल लेफ्ट को पवनमुक्तासन में बेहतर बनाने के लिए आपकी मदद कर सकते हैं। यह योगासन पेट क्षेत्र को देखा जा सकता है। इससे पेट की सजावट की वस्तुएं होती हैं। यह आसन भोजन को ठीक से पचाने और पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में मदद करता है। मध्यम दैनिक करने से हाइपरएसिडिटी, गैस, कब्ज और अपच से राहत मिलती है।

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हलासन: हाइपरएसिडिटी की समस्या हलासन का अभ्यास काफी मानी जाती है। इस आसन को करते समय शरीर हल की तरह दिखता है, इसलिए इसे हलासन कहते हैं। यह योगासन पाचन तंत्र को प्रदान करता है और डायजेशन को बेहतर बनाता है। नियमित रूप से प्रैक्टिस करने से कब्ज, अपच और एसिडिटी की समस्या दूर हो सकती है।

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